Strait of Hormuz : स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ओमान के तट के पास सोमवार तड़के एक वाणिज्यिक जहाज में अचानक भीषण आग लगने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। ब्रिटिश सेना के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी यूकेएमटीओ केंद्र ने इस घटना की आधिकारिक पुष्टि करते हुए एक गंभीर चेतावनी जारी की है। हालांकि, जहाज में आग लगने के वास्तविक कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

यह घटना ऐसे संवेदनशील समय पर घटी है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम सीमा पर पहुंच चुका है और दोनों देश पूर्ण युद्ध के मुहाने पर खड़े नजर आ रहे हैं। पिछले महीने हुआ अंतरिम शांति समझौता पूरी तरह टूट चुका है, जिसके चलते इस बेहद महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापारिक मार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह ठप हो गई है।

अमेरिका की नौवें दिन भी एयरस्ट्राइक जारी, 17 सैनिकों की मौत
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने सोमवार तड़के ईरान पर लगातार नौवें दिन भी अपने आक्रामक हवाई हमले जारी रखे। अमेरिका ने यह आक्रामक कार्रवाई शनिवार को इराक में एक मार गिराए गए ईरानी ड्रोन को नष्ट करने के दौरान अपने एक और अमेरिकी सैनिक की मौत की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद की है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस भीषण युद्ध में अब तक कुल 17 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। सेंट्रल कमांड ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि यह हवाई हमले ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को नेस्तनाबूद करने के लिए लगातार जारी रहेंगे, जिनका इस्तेमाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले नागरिक और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।
ईरान का बड़ा दावा, अमेरिकी हमलों में ‘दारखोविन’ परमाणु संयंत्र निशाना
ईरान की आधिकारिक परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिकी सेना के ताजा हमलों ने देश के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में स्थित एक निर्माणाधीन परमाणु ऊर्जा संयंत्र, ‘दारखोविन’ परमाणु साइट को सीधे तौर पर निशाना बनाया है।
हाल ही में सामने आई उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों के अनुसार, इस साइट पर अभी शुरुआती चरण का ही निर्माण कार्य चल रहा था। वहीं, संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठित परमाणु निगरानी संस्था यानी आईएईए ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि अपने हालिया निरीक्षण दौरे तक इस शुरुआती निर्माण स्थल पर किसी भी तरह की रेडियोएक्टिव या परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी, जिससे एक बड़ा संकट टल गया है।
ईरान का आक्रामक पलटवार, जॉर्डन और खाड़ी देशों को बनाया निशाना
अमेरिका और उसके सहयोगियों के हमलों का करारा जवाब देते हुए ईरान ने मध्य क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी देशों पर अपनी मिसाइल और ड्रोन हमलों की रफ्तार को काफी तेज कर दिया है। जॉर्डन की सेना ने सोमवार को कई खतरनाक ईरानी मिसाइलों को हवा में ही सफलतापूर्वक मार गिराया। इस दुस्साहस के कड़ा विरोध जताते हुए जॉर्डन ने तुरंत ईरानी राजदूत को तलब किया है। जॉर्डन के अकाबा शहर को निशाना बनाकर दागी गई इन मिसाइलों के बाद पड़ोसी देश इजरायल भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।
इजरायली सेना ने चेतावनी दी है कि इन मिसाइलों का मलबा उनके भूभाग में गिर सकता है, जिसकी वजह से पिछले कई हफ्तों बाद पहली बार देश में हवाई हमले के सायरन बजाए जा सकते हैं। इसके अलावा, कुवैत में एक महत्वपूर्ण बिजली और जल अलवणीकरण संयंत्र पर महज दो दिनों के भीतर दूसरी बार हमला हुआ है, जिससे वहां भयंकर आग लग गई है। कुवैत अपनी कुल पीने के पानी की 90 प्रतिशत जरूरतों के लिए पूरी तरह से इन्हीं संयंत्रों पर निर्भर है।
खाड़ी देशों का ईरान पर ‘युद्ध अपराध’ का गंभीर आरोप
खाड़ी सहयोग परिषद यानी जीसीसी के महासचिव जसीम मोहम्मद अल-बुदैवी ने नागरिक बुनियादी ढांचों और महत्वपूर्ण सुविधाओं पर लगातार हो रहे हमलों के लिए सीधे तौर पर ईरान के ऊपर ‘युद्ध अपराध’ का गंभीर आरोप मढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के नियमों के अनुसार पुलों, जल संयंत्रों और बिजली घरों जैसे आम नागरिकों से जुड़े ठिकानों पर हमले करना पूरी तरह प्रतिबंधित है, जब तक कि उनका इस्तेमाल किसी भी प्रकार के सैन्य उद्देश्यों के लिए न किया जा रहा हो। इस स्थिति के चलते पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में डर और अनिश्चितता का माहौल गहराता जा रहा है।
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