राष्ट्रीय

Tathagata Roy: सावरकर मसीहा, गांधी शैतान, तथागत रॉय का बयान, राजनीति में बढ़ा तनाव

Tathagata Roy: वरिष्ठ भाजपा नेता तथागत रॉय ने एक बार फिर से हिंदू-मुस्लिम मुद्दे को लेकर एक विवादित फेसबुक पोस्ट साझा किया है, जिसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। रॉय ने इस पोस्ट में महात्मा गांधी को ‘शैतान’ करार दिया और कहा कि हिंदू आज सिर ऊंचा करके जी रहे हैं क्योंकि वीर सावरकर को आज़ाद किया गया था। उन्होंने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि गांधी और नेहरू की नीतियों ने मुस्लिम कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया। रॉय का यह बयान बहुत तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, और इस पर कई लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

Tathagata Roy: सावरकर को ‘मसीहा’ और गांधी को ‘शैतान’ कहकर विवादित बयान

रॉय के फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “आज हम हिंदू सिर ऊंचा करके जी रहे हैं क्योंकि सावरकर को आज़ाद किया गया था। अगर सावरकर को आज़ाद नहीं किया जाता, तो शैतान मोहनदास गांधी हम सबको मुसलमानों का गुलाम बना देते। गांधी ने जिन्ना को अविभाजित भारत का प्रधानमंत्री बनाना चाहा था!” इसके साथ ही रॉय ने दावा किया कि गांधी और नेहरू के ‘सेकुलरिज़्म’ ने भारत में मुस्लिम कट्टरपंथ को जन्म दिया। उन्होंने सावरकर की हिंदू महासभा की भूमिका को भी अहम बताया और कहा कि इसने भारतीय जनसंघ और भा.ज.पा. को जन्म दिया।

Tathagata Roy: गांधी और नेहरू पर कड़ी आलोचना

तथागत रॉय ने अपनी पोस्ट में महात्मा गांधी और पंडित नेहरू की नीतियों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि इन दोनों नेताओं ने ‘सेकुलरिज़्म’ का जो रूप प्रस्तुत किया, उसने हिंदू-मुस्लिम मुद्दों को और बढ़ाया। रॉय का कहना था कि यह ‘बिगड़ा हुआ सेकुलरिज़्म’ ही आज के मुस्लिम कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रहा है। गांधी को लेकर उनके इस बयान ने आलोचनाओं का सामना किया, क्योंकि गांधी को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का महान नेता माना जाता है, और उनके विचारों को बहुत से लोग आदर्श मानते हैं।

सावरकर और हिंदू महासभा की राजनीति

रॉय ने यह भी दावा किया कि सावरकर की हिंदू महासभा को वोट तो नहीं मिले, लेकिन इसने भारतीय राजनीति में गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने कहा, “सावरकर की हिंदू महासभा ने हिंदुओं की सोच पर प्रभाव डाला, और इसने भारतीय जनसंघ को जन्म दिया, जिसने अंत में भा.ज.पा. के रूप में आकार लिया।” रॉय ने इस तरीके से बीजेपी के इतिहास को सावरकर और हिंदू महासभा के विचारों से जोड़ने की कोशिश की है। उनका मानना है कि यह विचारधारा आज भी बीजेपी की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

विवाद पर प्रतिक्रियाएं

रॉय के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं हैं। कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई अन्य ने उन्हें आलोचना का निशाना बनाया है। एक वर्ग का कहना है कि रॉय का बयान संघ के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में देश के इतिहास को केवल ‘भगवा दृष्टिकोण’ से देखने की कोशिश है, जो कि विभाजनकारी हो सकता है। रॉय का यह बयान ऐतिहासिक घटनाओं और नेताओं को लेकर चल रहे विवादों को और बढ़ा सकता है, जिससे सामूहिक राजनीति और सामाजिक ताने-बाने पर असर पड़ सकता है।

बीजेपी नेताओं के विवादित बयान

तथागत रॉय के बयान से पहले भी भाजपा नेताओं के कई विवादित बयान सामने आ चुके हैं, जो समाज में तनाव बढ़ाने का कारण बने हैं। इन बयानों में हिंदू-मुस्लिम, सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दों पर विवादित टिप्पणियां की गईं, जिनसे न केवल पार्टी को बल्कि समग्र राजनीतिक माहौल को भी चुनौती मिली। रॉय का बयान इस कड़ी में एक और नया उदाहरण बन गया है, जिससे पार्टी के भीतर और बाहर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

तथागत रॉय का यह पोस्ट भारतीय राजनीति में एक नया विवाद उत्पन्न कर सकता है, क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर महात्मा गांधी और पंडित नेहरू की नीतियों को निशाना बनाया है, और सावरकर को एक मसीहा के रूप में प्रस्तुत किया है। इस पोस्ट ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या इस तरह के विचार देश की राजनीति को और विभाजित करेंगे, या यह केवल एक बयानी विवाद का हिस्सा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बहस हो सकती है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय राजनीति में यह बयान किस प्रकार की प्रतिक्रिया को जन्म देता है।

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