SIR Case
SIR Case: तमिलनाडु में चुनाव आयोग द्वारा लागू किए गए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के खिलाफ विरोध लगातार बढ़ रहा है। समाजवादी पार्टी और ममता बनर्जी की पार्टी TMC ने इसका खुलकर विरोध किया है। वहीं, मुस्लिम लीग ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अब इस विरोध में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) भी शामिल हो गई है। TVK ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर SIR को चुनौती दी है।TVK की याचिका में SIR को मनमाना और राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित बताया गया है। पार्टी का कहना है कि SIR नई शर्तों के जरिए मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर कटौती कर सकता है। इसके साथ ही, तमिलनाडु की अन्य पार्टियां भी इस नए संशोधन के विरोध में हैं, जिनमें सत्तारूढ़ DMK, वामपंथी दल और दलित पार्टियां शामिल हैं।
TVK के अलावा DMK, CPI(M), विधायक के. सेल्वापेरुन्थगै, और Viduthalai Chiruthaigal Katchi (VCK) के सांसद थोल थिरुमावलवन ने भी अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। इन याचिकाओं में कहा गया है कि अक्टूबर 2024 से 6 जनवरी 2025 तक स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) पहले ही संपन्न हो चुका है और मतदाता सूची नियमित रूप से अपडेट हो रही है।इसके बावजूद नई SIR में 2003 की मतदाता सूची के आधार पर नागरिकता सत्यापन की नई शर्तें लगाना गलत है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे लाखों मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है, जो चुनाव प्रक्रिया के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
इस मामले में तमिलनाडु की विपक्षी पार्टी AIADMK ने अलग याचिका दाखिल कर SIR का समर्थन किया है। पार्टी का कहना है कि यह कदम चुनावों में धांधली रोकने और फर्जी वोटरों को रोकने के लिए आवश्यक है। AIADMK ने जोर देकर कहा कि SIR चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।SIR को लेकर विरोध केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है। केरल, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में भी इस पर याचिकाएं दाखिल की गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दल और नागरिक समूह SIR के नागरिकता सत्यापन के नए नियमों को चुनौती दे रहे हैं। ये याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में इस संशोधन के कानूनी और संवैधानिक वैधता की समीक्षा की मांग करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच इस मामले की सुनवाई 26 नवंबर को करेगी। TVK की ओर से इस मामले में पैरवी वकील यश विजय कर रहे हैं। कोर्ट की सुनवाई के दौरान SIR की वैधता और इसके राजनीतिक प्रभावों पर गहन बहस होने की संभावना है।SIR को लेकर जारी विवाद यह दिखाता है कि चुनाव आयोग के नए उपाय राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों के बीच विभाजन पैदा कर सकते हैं। विरोध में शामिल पार्टियों का तर्क है कि नए नियम मतदाता अधिकारों पर असर डाल सकते हैं, जबकि समर्थक इसे चुनाव प्रक्रिया को मजबूत बनाने वाला कदम मानते हैं। इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आने वाले दिनों में चुनावी और राजनीतिक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
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