NH-130 Road Quality Issue: नेशनल हाईवे 130 (NH-130) पर बना मदांगमुड़ा से देवभोग (उड़ीसा बॉर्डर) तक का सड़क मार्ग पहली ही बारिश में जर्जर हो गया। सड़क निर्माण में लगभग 74 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन महज तीन माह में ही इसकी हालत बदहाल हो गई। अब निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बारिश में उधड़ी सड़क, टूटे डामर और दरारें स्थानीय लोगों की मानें तो जैसे ही क्षेत्र में पहली बारिश हुई, सड़क की परतें उखड़ने लगीं और कई जगह दरारें दिखने लगीं। डामर की सतह बह गई और सड़क के किनारे कटाव भी देखने को मिला। इससे साफ जाहिर होता है कि निर्माण कार्य में या तो मानक सामग्री का उपयोग नहीं हुआ, या फिर तकनीकी दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई। 74 करोड़ की लागत, लेकिन नतीजा निराशाजनक एनएच 130 का यह हिस्सा बेहद अहम है, जो छत्तीसगढ़ को उड़ीसा से जोड़ता है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 74 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बावजूद सड़क 74 दिन भी ठीक से नहीं टिक पाई। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का फूटा गुस्सा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा किया गया यह निर्माण कार्य घटिया स्तर का था। लोगों का कहना है कि गुणवत्ता की जांच किए बिना ही सड़क का उपयोग शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों ने की शिकायत की तैयारी ग्रामीणों ने बताया कि वे अब सामान्य प्रशासन विभाग और उच्च अधिकारियों को बिंदुवार शिकायत भेजने की तैयारी में हैं। उन्होंने निर्माण कार्य में कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया है: प्रमुख शिकायतें इस प्रकार हैं: भूमि अधिग्रहण में अनियमितता – प्रत्येक दिशा में 12 मीटर भूमि अधिग्रहण का प्रावधान था, लेकिन कई स्थानों पर इसका पालन नहीं किया गया। भेदभावपूर्ण अतिक्रमण हटाना – मुड़ागांव और चिचिया में गरीबों के घरों और शौचालयों को तोड़ दिया गया, जबकि रसूखदारों के निर्माण को छोड़ दिया गया। पार्किंग टाइल्स का निर्माण अधूरा – शहर क्षेत्र में पार्किंग टाइल्स लगाने की योजना थी, लेकिन अभी तक उस पर कोई कार्य नहीं हुआ। अधूरा कार्य और दरारें – निर्माण अभी तक पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ, फिर भी सड़क में दरारें दिखने लगी हैं। जांच की मांग तेज लोगों की मांग है कि इस प्रोजेक्ट की निष्पक्ष तकनीकी और वित्तीय जांच की जाए। दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई न जाए। 74 करोड़ की लागत से बनी सड़क का इतनी जल्दी खराब हो जाना जनता के पैसे की बर्बादी है। यह घटना न केवल सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत को भी उजागर करती है। यदि समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं आम हो जाएंगी। Read More : US India News: अमेरिका के लिए अहम है भारत: विदेश मंत्री जयशंकर और मार्को रुबियो की मुलाकात के बाद रिश्तों में नई गर्माहट
















