Operation Tiger : महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं के बीच शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी को बिखरने से बचाने के लिए सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी के भीतर चल रही टूट की खबरों के बीच, ठाकरे ने आज सुबह 11 बजे दिल्ली स्थित संसद भवन में अपने सभी सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पार्टी के भीतर बागी सुरों को थामना और संगठन को एकजुट रखना है। राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को शिवसेना (UBT) के भविष्य के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। ठाकरे इस बैठक के जरिए यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश करेंगे कि पार्टी अभी भी उनके नेतृत्व में मजबूती से खड़ी है।

बागी सांसदों का दावा और पार्टी का रुख
सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (UBT) के 6 सांसद बागी रुख अपनाए हुए हैं, जिसके चलते पार्टी के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व का दावा है कि इन 6 सांसदों में से अभी भी दो सदस्य उद्धव ठाकरे के संपर्क में हैं और उम्मीद है कि वे आज की बैठक में शामिल होंगे। दूसरी ओर, बागी गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा है। बागी नेताओं का दावा है कि उन्हें लोकसभा में पार्टी के कुल 9 सांसदों में से 6 का स्पष्ट समर्थन प्राप्त है। बागी गुट जल्द ही एक औपचारिक बैठक के जरिए खुद को अलग धड़ा घोषित करने और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय करने की मांग रख सकता है।

उद्धव ठाकरे की दोहरी रणनीति: दिल्ली से मुंबई तक बैठकों का दौर
सांसदों के बाद अब उद्धव ठाकरे ने अपने विधायकों पर भी ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है। संगठन को टूट से बचाने के लिए उन्होंने 22 जून को मुंबई स्थित ‘शिवालय’ कार्यालय में शाम 4 बजे सभी विधायकों की एक अहम बैठक बुलाई है। दिल्ली और मुंबई में होने वाली ये बैठकें ठाकरे की उस रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत वे पार्टी के आधार को सुरक्षित करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य न केवल बागी नेताओं के मंसूबों पर पानी फेरना है, बल्कि आने वाले समय में कानूनी और राजनीतिक लड़ाई के लिए पार्टी को तैयार करना भी है।
कानूनी पेच और संविधान का हवाला
इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता—अरविंद सावंत, अनिल देसाई और संजय राउत ने भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भेंट की है। इन नेताओं ने स्पष्ट रूप से आग्रह किया है कि दल-बदल या विलय संबंधी कोई भी फैसला नियमों, कानून, संविधान और विशेष रूप से उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के निर्देशों के अनुरूप ही लिया जाना चाहिए। पार्टी नेतृत्व का यह प्रयास है कि किसी भी प्रकार की असंवैधानिक प्रक्रिया को रोका जाए।
राजनीतिक भविष्य की अनिश्चितता
‘ऑपरेशन टाइगर’ ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सस्पेंस पैदा कर दिया है। क्या उद्धव ठाकरे अपने सांसदों और विधायकों को एक साथ रख पाएंगे? या फिर बागी गुट शिंदे खेमे में शामिल होकर ठाकरे के लिए मुश्किलें और बढ़ा देगा? आने वाला समय ही बताएगा कि शिवसेना (UBT) इन चुनौतियों का सामना कैसे करती है। दिल्ली की आज की बैठक और 22 जून की विधायक बैठक यह तय करेगी कि शिवसेना (UBT) का भविष्य किस दिशा में जाएगा। पूरे राज्य की निगाहें इन बैठकों और बागी गुट के अगले कदमों पर टिकी हैं।
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