BSP MLA : उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (BSP) के विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार देर रात निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही बलिया सहित पूरे पूर्वांचल में शोक का माहौल बन गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे और पिछले कई महीनों से अपने आवास पर ही उपचार ले रहे थे। फरवरी 2026 में भी उनके स्वास्थ्य को लेकर कई रिपोर्टें सामने आई थीं। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक दोनों क्षेत्रों में शोक की लहर है।

समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
उमाशंकर सिंह के निधन की पुष्टि के बाद बड़ी संख्या में समर्थक, पार्टी कार्यकर्ता और शुभचिंतक उनके आवास पहुंचने लगे। रसड़ा और बलिया क्षेत्र में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके निधन के साथ ही उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो गया है, क्योंकि वह बसपा के इकलौते विधायक थे। यह पार्टी के लिए भी एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ लंबा राजनीतिक सफर
उमाशंकर सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1990 में बलिया के एएसी कॉलेज से की थी, जहां वह छात्रसंघ के महामंत्री चुने गए। इसके बाद उन्होंने स्थानीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और वर्ष 2000 में बलिया जिला पंचायत के अध्यक्ष बने। इस पद पर रहते हुए उन्होंने क्षेत्र में मजबूत जनाधार तैयार किया और अपनी अलग पहचान बनाई।
बसपा में शामिल होकर लगातार तीन बार बने विधायक
साल 2011 में उमाशंकर सिंह ने बहुजन समाज पार्टी का दामन थामा। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने रसड़ा सीट से पहली बार जीत हासिल की। उस समय पूरे प्रदेश में बसपा का प्रदर्शन कमजोर रहा था, लेकिन उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सनातन पांडेय को बड़े अंतर से हराकर जीत दर्ज की। इसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने लगातार जीत हासिल की। वर्ष 2022 में वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा के एकमात्र विधायक बनकर पहुंचे थे।
मायावती ने जताया गहरा शोक
बसपा प्रमुख मायावती ने उमाशंकर सिंह के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें पार्टी का समर्पित, ईमानदार और पूरी तरह वफादार नेता बताया। मायावती ने कहा कि उमाशंकर सिंह और उनका परिवार लंबे समय से पार्टी से जुड़ा रहा है। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान वह लगातार उनके बेटे के संपर्क में थीं और निधन की जानकारी भी उन्हें परिवार की ओर से ही मिली। साथ ही उन्होंने परिवार को हर संभव सहयोग देने का भरोसा भी दिलाया।

अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी उमाशंकर सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया और इसे राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा रही कि उनके विभिन्न दलों के नेताओं से व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंध काफी अच्छे थे। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह से भी उनका पारिवारिक रिश्ता था, क्योंकि उनके बेटे का विवाह दिनेश प्रताप सिंह की बेटी से हुआ था।
सामाजिक कार्यों के लिए भी रहे चर्चित
राजनीति के अलावा उमाशंकर सिंह समाजसेवा के कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। वर्ष 2012 में उन्होंने 251 कन्याओं का सामूहिक विवाह आयोजित कराया था। इसके बाद वर्ष 2016 में 351 हिंदू और मुस्लिम जोड़ों का सामूहिक विवाह कराकर सामाजिक सौहार्द और एकता का संदेश दिया। उनके इन आयोजनों की प्रदेशभर में काफी चर्चा हुई थी और उन्हें सामाजिक सरोकारों से जुड़ा जनप्रतिनिधि माना जाता था।
सदस्यता रद्द होने का मामला भी रहा सुर्खियों में
उमाशंकर सिंह के राजनीतिक जीवन में वर्ष 2017 एक महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आया। 14 जनवरी 2017 को तत्कालीन राज्यपाल राम नाइक ने लोकायुक्त की जांच के आधार पर उन्हें विधायक पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। उन पर सरकारी ठेके अपने नाम रखने के आरोप लगे थे, जिन्हें जांच में सही पाया गया। हाईकोर्ट के निर्देश और चुनाव आयोग की संस्तुति के बाद उनकी सदस्यता समाप्त की गई थी। इसे उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक चर्चित मामला माना गया, क्योंकि पहली बार किसी विधायक की सदस्यता पिछली तारीख से रद्द की गई थी। उनके निधन के साथ प्रदेश की राजनीति ने एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता को खो दिया।
Read more : Ranchi Student Protest : रांची छात्र आंदोलन पर सरकार का वार्ता प्रस्ताव, आज तय होगा छात्र प्रतिनिधिमंडल गठन












