Ranchi Student Protest :,झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने समाधान की दिशा में पहल की है। लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को प्रशासन के माध्यम से औपचारिक वार्ता का प्रस्ताव भेजा गया है। अब आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र प्रतिनिधिमंडल का गठन करने की तैयारी में जुट गए हैं, ताकि सरकार के सामने अपनी मांगों और समस्याओं को व्यवस्थित तरीके से रखा जा सके।

प्रशासन के जरिए छात्रों तक पहुंचा सरकार का संदेश
छात्र नेता रविंद्र पासवान ने जानकारी दी कि सरकार का संदेश स्थानीय प्रशासन और एसडीएम के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाया गया है। प्रस्ताव के अनुसार सरकार छात्र प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक बैठक करना चाहती है, जिसमें आंदोलन से जुड़े सभी प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। सरकार का उद्देश्य बातचीत के जरिए समाधान निकालना बताया जा रहा है।

प्रतिनिधिमंडल गठन की प्रक्रिया हुई तेज
छात्र संगठनों ने सरकार के प्रस्ताव के बाद प्रतिनिधिमंडल तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रविंद्र पासवान के अनुसार प्रतिनिधिमंडल में ऐसे छात्रों को शामिल किया जाएगा जो आंदोलन की मांगों, परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और छात्रों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से सरकार के सामने रख सकें। उन्होंने बताया कि सुबह 10 बजे तक प्रतिनिधिमंडल को अंतिम रूप देने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार को दी जाएगी अंतिम जानकारी
प्रतिनिधिमंडल तय होने के बाद छात्र नेता सरकार को अपने निर्णय की आधिकारिक जानकारी देंगे। इसके बाद बातचीत की तारीख, समय और स्थान को लेकर अंतिम सहमति बनने की संभावना है। छात्र नेताओं का कहना है कि वे चाहते हैं कि वार्ता केवल औपचारिकता न हो, बल्कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए और ठोस निर्णय सामने आए।
12 दिनों से जारी है छात्रों का आंदोलन
रविंद्र पासवान ने कहा कि छात्रों का आंदोलन पिछले 12 दिनों से लगातार जारी है। इस दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है और इसका उद्देश्य केवल भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता तथा निष्पक्षता सुनिश्चित कराना है।

सरकार के रवैये पर छात्रों ने उठाए सवाल
छात्र नेताओं ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि आंदोलन शुरू होने के बाद विपक्ष के कई नेता धरना स्थल पर पहुंचे और छात्रों से मुलाकात कर उनका पक्ष जाना। लेकिन अब तक मुख्यमंत्री की ओर से कोई मंत्री या वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधि आंदोलन स्थल पर छात्रों से मिलने नहीं पहुंचा। छात्रों का मानना है कि सरकार को पहले ही संवाद शुरू कर देना चाहिए था।
वार्ता से पहले मांगों की सूची होगी तैयार
छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार के साथ होने वाली बैठक में किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा, इस पर प्रतिनिधिमंडल के गठन के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके लिए आंदोलन से जुड़े सभी छात्रों की राय ली जाएगी और एक विस्तृत मांग पत्र तैयार किया जाएगा, ताकि बातचीत के दौरान किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे की अनदेखी न हो।
आगे की रणनीति पर भी होगा फैसला
छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि सरकार के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। यदि वार्ता सकारात्मक रहती है और मांगों पर ठोस आश्वासन मिलता है, तो आंदोलन की आगे की दिशा पर पुनर्विचार किया जा सकता है। वहीं यदि बातचीत से संतोषजनक समाधान नहीं निकलता है, तो छात्र आगे की रणनीति तय करेंगे। फिलहाल सभी की निगाहें प्रस्तावित वार्ता और उससे निकलने वाले परिणामों पर टिकी हुई हैं।
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