बहरीन में अमेरिकी कमांडर के साथ सीरिया और लेबनान की अहम बैठक के बाद मिडिल ईस्ट की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। ईरान इस कदम से नाराज़ होकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना दावा दोहराने लगा है। क्या यह नई टकराव की शुरुआत है?
बहरीन में अमेरिकी कमांडर के साथ सीरिया और लेबनान की अहम बैठक के बाद मिडिल ईस्ट की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। ईरान इस कदम से नाराज़ होकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना दावा दोहराने लगा है। क्या यह नई टकराव की शुरुआत है?

US Middle East : पश्चिम एशिया में सुरक्षा और भू-राजनीतिक वर्चस्व की जंग एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गई है। बहरीन की राजधानी मनामा में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के तत्वावधान में एक ऐतिहासिक क्षेत्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस उच्च स्तरीय बैठक की सबसे बड़ी विशेषता क्षेत्र के 12 देशों के सैन्य प्रमुखों की उपस्थिति रही। इसमें सीरिया और लेबनान जैसे देशों का शामिल होना रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ये देश आमतौर पर अमेरिकी सैन्य गठबंधन से दूरी बनाए रखते हैं। इस सम्मेलन का प्राथमिक एजेंडा मध्य पूर्व के लिए एक ‘एकीकृत हवाई रक्षा छतरी’ (Unified Air Defence Umbrella) का निर्माण करना और वैश्विक व्यापार के लिए जीवनरेखा समान समुद्री मार्गों को सुरक्षित करना था।


अमेरिका के इस सैन्य प्रयासों पर ईरान ने अत्यंत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के माध्यम से इस सम्मेलन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट रूप से सवाल उठाया कि क्या CENTCOM की मौजूदगी क्षेत्र में शांति ला रही है या यह असुरक्षा का कारण बन रही है। अराघची ने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति कभी भी पेंटागन के साये में नहीं आ सकती। उन्होंने दावा किया कि बाहरी ताकतें न केवल क्षेत्र को अस्थिर कर रही हैं, बल्कि वे स्वयं भी अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं हैं। ईरान का स्पष्ट रुख है कि पश्चिम एशिया की सुरक्षा केवल तभी संभव है जब वह समावेशी हो और उसमें किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप न हो।

इस सैन्य सम्मेलन की वैधता को ईरान ने सिरे से नकार दिया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गारीबाबादी ने फारस की खाड़ी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में सुरक्षा ढांचे को तय करने के किसी भी पश्चिमी प्रयास का विरोध किया है। गारीबाबादी ने कड़े शब्दों में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण और सुरक्षा ईरान की कमान के तहत है, न कि CENTCOM के अधीन। उन्होंने स्पष्ट किया कि बहरीन में आयोजित कोई भी शिखर सम्मेलन फारस की खाड़ी के लिए कानूनी या सुरक्षा व्यवस्था निर्धारित करने में अक्षम है।
ईरान के आधिकारिक बयानों से यह स्पष्ट है कि तेहरान अब पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को अपनी संप्रभुता के लिए खतरा मानता है। ईरान की मांग है कि अमेरिका को न केवल इस क्षेत्र से अपनी सेना हटानी चाहिए, बल्कि इस क्षेत्र की नई भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को भी स्वीकार करना चाहिए। ईरान का मानना है कि क्षेत्रीय देशों के बीच आपसी विश्वास ही एकमात्र रास्ता है, न कि अमेरिकी संरक्षण में कोई सैन्य गुट बनाना। यह बढ़ता टकराव संकेत देता है कि पश्चिम एशिया आने वाले समय में कूटनीतिक और सैन्य मोर्चे पर और अधिक जटिल और संवेदनशील होने वाला है, जहाँ वर्चस्व की लड़ाई क्षेत्रीय सुरक्षा को अनिश्चितता के दौर में धकेल रही है।
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