अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता अचानक टूटने की खबर सामने आई है जिसके बाद रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से बंद कर दिया गया है इस घटनाक्रम से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है और वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर संकट के बादल मंडराने लगे हैं…
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता अचानक टूटने की खबर सामने आई है जिसके बाद रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से बंद कर दिया गया है इस घटनाक्रम से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है और वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर संकट के बादल मंडराने लगे हैं…

US Iran Conflict : जी-7 समिट में जिस ऐतिहासिक समझौते की उम्मीद जगी थी, वह महज 36 घंटों के भीतर धराशाई हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस शांति समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए खोलने का निर्णय लिया गया था, लेकिन ईरान ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए ईरान समर्थित आईआरजीसी (IRGC) ने चेतावनी जारी की है कि कोई भी जहाज इस जलमार्ग से गुजरने की गलती न करे। होर्मुज का फिर से बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति केंद्रों में से एक है।

ईरान का स्पष्ट तर्क है कि यह समझौता इजराइल द्वारा लेबनान पर हमले जारी रखने के कारण विफल हुआ है। समझौते की पहली शर्त यह थी कि सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तत्काल प्रभाव से रोकी जाएगी। हालांकि, स्विट्जरलैंड वार्ता से ठीक पहले इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हवाई हमले तेज कर दिए, जिसमें कई लोग हताहत हुए। इसे ईरान ने समझौते का सीधा उल्लंघन माना है। इसके बाद, ईरान ने स्विट्जरलैंड वार्ता के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल के टिकट रद्द कर दिए और होर्मुज पर फिर से ‘बारूदी बैरियर’ लगा दिया। ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक इजराइल हमले नहीं रोकता, वह किसी भी बातचीत की मेज पर नहीं बैठेगा।

इस पूरे संकट के केंद्र में ईरान का ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ का प्रस्ताव है। ईरान का दावा था कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत वह जहाजों को सुरक्षा और नेविगेशन प्रबंधन जैसी सेवाएं देने के बदले ‘मैरीटाइम सर्विस फीस’ वसूल सकता है। हालांकि, अमेरिका, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। इन देशों का मानना है कि यदि ईरान को शुल्क वसूलने की अनुमति दी गई, तो यह अन्य अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के लिए एक खतरनाक मिसाल बन जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसे ‘फ्री पैसेज’ वाला अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताया है, जबकि ईरान अपनी संप्रभुता और ओमान सल्तनत के साथ मिलकर नई प्रशासनिक व्यवस्था बनाने पर अड़ा हुआ है।
समझौता टूटने से पहले, होर्मुज के खुलने के कुछ ही घंटों में 12.5 मिलियन बैरल तेल का परिवहन हुआ था, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई थी। लेकिन अब, ईरान के इस कदम के बाद फिर से वैश्विक महामंदी और ऊर्जा संकट का खतरा गहरा गया है। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अब उसे कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा और वह ‘पूरी तरह खत्म’ हो चुका है। कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा है। ईरान का अपने नियंत्रण को ओमान के साथ साझा करने का फैसला और इजराइल की सैन्य कार्रवाई ने शांति की उम्मीदों को खत्म कर दिया है, जिससे क्षेत्र में तीसरे बड़े महासंग्राम की आहट सुनाई दे रही है।
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