US Iran Talks : दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव अब कम होता दिखाई दे रहा है। ईरान ने बुधवार को संकेत दिया कि ओमान की मध्यस्थता में तैयार किया जा रहा समझौते का मसौदा अंतिम चरण में पहुंच चुका है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस सप्ताह इस मुद्दे पर बड़ी घोषणा होने के संकेत दिए हैं। यदि यह समझौता सफल होता है तो वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बड़ी राहत मिल सकती है।

ओमान की मध्यस्थता से आगे बढ़ी बातचीत
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि ओमान दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और समझौते का प्रारूप लगभग तैयार हो चुका है। उनके अनुसार यदि किसी भी पक्ष की ओर से अंतिम समय में कोई बाधा नहीं आई, तो जल्द ही इस संबंध में संयुक्त बयान जारी किया जा सकता है। क्षेत्रीय सूत्रों का कहना है कि मसौदा तैयार है, लेकिन इसे लागू करने से पहले ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की अंतिम मंजूरी आवश्यक होगी।

सबसे बड़ा विवाद किन मुद्दों पर है?
प्रस्तावित समझौते का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह सामान्य बनाना है। इसके बदले ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके बंदरगाहों पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में राहत दे। दूसरी ओर अमेरिका का स्पष्ट रुख है कि वह किसी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा, जिससे ईरान को इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर स्थायी नियंत्रण या गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने का अधिकार मिल जाए। यही मुद्दा दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
युद्ध के बाद बढ़ा था समुद्री तनाव
अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया था। अमेरिका का कहना था कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाना और तेहरान पर दबाव बनाना था। हालांकि संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संवेदनशील क्षेत्र बन गया। जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई और कई घटनाओं के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की संख्या में भारी कमी दर्ज की गई।
दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा सीधा असर
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी समुद्री मार्ग से होकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है। जब इस रास्ते पर तनाव बढ़ा तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली। इसके साथ ही परिवहन लागत बढ़ने से ईंधन और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम भी प्रभावित हुए, जिसका असर कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा।

परमाणु वार्ता दोबारा शुरू होने की संभावना
सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित समझौता केवल समुद्री मार्ग खोलने तक सीमित नहीं रहेगा। यदि दोनों देश इस पर सहमत होते हैं तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से रुकी बातचीत फिर शुरू हो सकती है। बताया जा रहा है कि जून में भी दोनों पक्षों के बीच प्रारंभिक सहमति बनी थी, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो सका। मौजूदा मसौदे को उसी प्रयास का संशोधित और अधिक व्यावहारिक संस्करण माना जा रहा है।
जहाजों के लिए अलग-अलग समुद्री मार्ग का प्रस्ताव
क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था के तहत फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाज ईरान के नियंत्रण वाले मार्ग का उपयोग करेंगे, जबकि बाहर निकलते समय ओमान के अधिकार क्षेत्र वाले मार्ग से गुजरेंगे। समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए सेवा शुल्क का प्रस्ताव भी सामने आया है। हालांकि अमेरिका इस बात पर आपत्ति जता चुका है कि ईरान को जहाजों से किसी प्रकार का शुल्क वसूलने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए।
अंतिम मंजूरी के बाद ही लागू होगा समझौता
फिलहाल समझौते का मसौदा तैयार बताया जा रहा है, लेकिन इसे लागू करने के लिए दोनों देशों की राजनीतिक मंजूरी अभी बाकी है। जलडमरूमध्य पर नियंत्रण, प्रतिबंधों में ढील और शुल्क जैसे मुद्दों पर मतभेद पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। यदि सभी विवादों का समाधान हो जाता है, तो यह समझौता न केवल मध्य पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और विश्व अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक साबित हो सकता है।
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