पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हिंसा और विरोध-प्रदर्शनों के बीच मतदान संपन्न हुआ। शुरुआती रुझानों में PML-N को बढ़त मिलती दिख रही है, जिससे करीब 10 साल बाद नवाज शरीफ की पार्टी की सत्ता में वापसी की संभावना मजबूत हो गई है।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हिंसा और विरोध-प्रदर्शनों के बीच मतदान संपन्न हुआ। शुरुआती रुझानों में PML-N को बढ़त मिलती दिख रही है, जिससे करीब 10 साल बाद नवाज शरीफ की पार्टी की सत्ता में वापसी की संभावना मजबूत हो गई है।

PoK Election : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के पहले दो चरणों की मतगणना के बाद पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने शानदार प्रदर्शन किया है। शुरुआती नतीजों के अनुसार पार्टी ने अधिकांश सीटों पर बढ़त हासिल कर ली है, जिससे क्षेत्र में करीब एक दशक बाद उसकी सत्ता में वापसी लगभग तय मानी जा रही है। चुनाव सुरक्षा व्यवस्था और भारी मानसूनी बारिश के बीच तीन चरणों में कराए जा रहे हैं।

चुनाव आयोग के अनुसार पहले दो चरणों में कई संवेदनशील इलाकों में शांतिपूर्ण मतदान कराया गया। मुजफ्फराबाद सहित विभिन्न क्षेत्रों में मतदाताओं ने उत्साह के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग किया। कई स्थानों पर मतदान प्रतिशत 50 से 56 फीसदी से अधिक दर्ज किया गया। अब शेष 11 विधानसभा सीटों पर मतदान 10 अगस्त को होना प्रस्तावित है, जिसके बाद अंतिम तस्वीर सामने आएगी।

क्षेत्रीय चुनाव आयोग के प्रवक्ता राजा शकील ने बताया कि पहले दो चरणों में घोषित 34 सीटों में से PML-N ने 24 सीटों पर जीत दर्ज की है। इस प्रदर्शन के बाद पार्टी की सरकार बनने की संभावना काफी मजबूत हो गई है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने विजयी उम्मीदवारों को बधाई देते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के भरोसे का परिणाम बताया।
चुनाव से पहले प्रतिबंधित संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने लोगों से मतदान का बहिष्कार करने की अपील की थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केंद्रों तक पहुंचे और वोट डाले। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोगों ने विरोध और तनावपूर्ण माहौल के बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
चुनाव के दौरान सबसे बड़ा विवाद कश्मीर से विस्थापित लोगों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को लेकर सामने आया। JAAC का कहना है कि PoK से बाहर रहने वाले लोगों को इन सीटों के माध्यम से अनुचित राजनीतिक प्रभाव मिलता है, इसलिए इन्हें समाप्त किया जाना चाहिए। दूसरी ओर प्रशासन और सरकार का कहना है कि ये सीटें संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और इन्हें केवल संविधान में संशोधन के बाद ही बदला जा सकता है।

जून में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि आरक्षित सीटों को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। अदालत ने कहा कि बिना संवैधानिक संशोधन के इन्हें समाप्त नहीं किया जा सकता। सरकार का दावा है कि JAAC की अधिकांश मांगों को स्वीकार कर लिया गया है और केवल आरक्षित सीटों का मुद्दा नई विधानसभा के स्तर पर ही तय किया जा सकता है।
चुनाव प्रचार अभियान कई सप्ताह तक विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक तनाव के बीच चला। JAAC के समर्थकों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर झड़पें भी हुईं। मतदान से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया ताकि चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जा सके। सरकार ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए हाल ही में JAAC पर प्रतिबंध लगाया था।
प्रशासन का आरोप है कि JAAC के कुछ समर्थकों ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारियों के बीच पाकिस्तान तहरीक-ए-तालिबान (TTP) से जुड़े तत्वों की घुसपैठ की आशंका है। हालांकि JAAC ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। संगठन की स्थापना 2023 में हुई थी और वह क्षेत्र के लोगों के लिए अधिक राजनीतिक अधिकारों की मांग करता रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विरोध, हिंसा और बहिष्कार की अपील के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का मतदान करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को दर्शाता है। अब सभी की निगाहें 10 अगस्त को होने वाले तीसरे चरण के मतदान और अंतिम चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जिनसे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की नई सरकार की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।
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