WHO cough syrup warning: भारत में बनी तीन कफ सिरप को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गंभीर चेतावनी जारी की है। WHO के अनुसार, ये सिरप बच्चों की जान के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं और कई देशों में स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकते हैं। इन तीनों सिरप में से एक, कोल्ड्रिफ, मध्य प्रदेश में अब तक 5 साल से कम उम्र के 25 बच्चों की मौत का कारण बन चुकी है।

किन कफ सिरप पर WHO ने जताई चिंता?
WHO ने जिन तीन सिरप पर सवाल उठाए हैं, वे हैं:

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कोल्ड्रिफ – निर्माता: श्रीसन फार्मास्युटिकल्स (तमिलनाडु)
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रेस्पिफ्रेश टीआर – निर्माता: रेडनेक्स फार्मास्युटिकल्स
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रीलाइफ – निर्माता: शेप फार्मा
इन दवाओं में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे खतरनाक रसायन पाए गए हैं, जो किडनी फेलियर और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं।
कोल्ड्रिफ सिरप से MP में हुईं बच्चों की मौतें
मध्य प्रदेश में सितंबर 2025 से अब तक 25 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिनकी उम्र 5 साल से कम थी। कोल्ड्रिफ सिरप के बैच SR-13 की जांच में सामने आया कि इसमें DEG की मात्रा 48.6% w/v थी, जो तय सीमा से लगभग 500 गुना ज्यादा है। DEG एक औद्योगिक सॉल्वेंट है जो फार्मास्यूटिकल ग्रेड नहीं होता और शरीर के लिए अत्यंत विषैला है।
WHO ने भारत से मांगी जानकारी
WHO ने 9 अक्टूबर को भारत सरकार से पूछा कि क्या यह सिरप विदेशों में भी निर्यात हुआ है। इस पर भारत की CDSCO (Central Drugs Standard Control Organization) ने जवाब दिया कि फिलहाल न तो इन दवाओं का निर्यात हुआ है और न ही कोई अवैध निर्यात का प्रमाण मिला है।
श्रीसन फार्मा पर कार्रवाई
तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मास्युटिकल्स का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है और कंपनी को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। कंपनी के 75 वर्षीय मालिक रंगनाथन गोविंदन को 9 अक्टूबर को चेन्नई से गिरफ्तार किया गया। उन्हें मध्य प्रदेश पुलिस की SIT द्वारा हिरासत में लिया गया और अब वे 20 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड में हैं।
सिरप की जांच में क्या सामने आया?
चेन्नई की सरकारी लैब में जांच में पाया गया कि कोल्ड्रिफ सिरप में नॉन-फार्माकॉपिया ग्रेड के घटक इस्तेमाल किए गए। इससे यह उत्पाद ‘Not of Standard Quality’ घोषित किया गया। DEG और EG दोनों ही शरीर के लिए घातक होते हैं और विशेष रूप से बच्चों के लिए यह जहर साबित हुआ है।WHO की यह चेतावनी देश के दवा निर्माण क्षेत्र में लापरवाही और मानव जीवन के साथ खिलवाड़ की एक बड़ी मिसाल है। इस मामले ने दवा नियामकों की जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम जनता से अपील है कि किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले उसकी ब्रांड, बैच नंबर और निर्माता की जानकारी अवश्य लें।
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