US Trade Policy 2025 : अमेरिका के वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में बड़ा संकेत देते हुए कहा है कि अमेरिका उन देशों पर नए टैरिफ लगा सकता है जो अब भी रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहे हैं। इस बयान से भारत की चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पहले ही भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा चुका है। इससे भारत पर कुल टैरिफ 50% तक पहुंच चुका है – जो किसी भी देश पर लगाए गए सबसे कठोर व्यापारिक शुल्कों में शामिल है।

रूस से तेल खरीद पर भारत पर निशाना
बेसेंट ने NBC न्यूज से बातचीत में साफ किया कि अमेरिका का अगला कदम उन देशों के खिलाफ होगा जो रूस के साथ तेल व्यापार जारी रखे हुए हैं। उन्होंने कहा, “अगर रूस पर वाकई दबाव बनाना है, तो हमें उन देशों पर भी कार्रवाई करनी होगी जो उसकी अर्थव्यवस्था को तेल खरीद के ज़रिए सहारा दे रहे हैं।”

अमेरिका का मानना है कि रूस से कच्चा तेल खरीदना, विशेषकर युद्धकाल में, यूक्रेन-रूस युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से फंडिंग करने जैसा है। यही कारण है कि ट्रंप प्रशासन इस मामले में भारत को भी कठघरे में खड़ा कर चुका है।
यूरोपीय सहयोग की अपील
स्कॉट बेसेंट ने यूरोपीय संघ से अपील की है कि वह अमेरिका के साथ मिलकर रूस पर दबाव बनाने के लिए सामूहिक आर्थिक प्रतिबंध लागू करे। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका और यूरोप साथ आते हैं, तो हम द्वितीयक टैरिफ और कड़े प्रतिबंधों के जरिए रूस की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से झुका सकते हैं।”
युद्ध के बीच आर्थिक रणनीति
बेसेंट का बयान ऐसे समय आया है जब रूस ने यूक्रेन के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला किया है। इसके बाद ट्रंप और पुतिन के बीच अलास्का में बैठक हुई थी। इसके बाद ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं को व्हाइट हाउस में शांति वार्ता के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि, वार्ता फिलहाल ठप्प पड़ी हुई है और संघर्ष जारी है।
सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ मामला
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में एक महत्वपूर्ण केस चल रहा है, जिसमें ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ को चुनौती दी गई है। बेसेंट ने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि हम सुप्रीम कोर्ट में जीतेंगे और राष्ट्रपति के पास व्यापक व्यापारिक टैरिफ लगाने का अधिकार बहाल रहेगा।”
भारत की रणनीतिक दुविधा
भारत के लिए यह स्थिति कूटनीतिक और आर्थिक दोनों ही स्तरों पर चुनौतीपूर्ण बन चुकी है। एक ओर उसे अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए रूस से सस्ता तेल खरीदना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है।
अगर अमेरिका भारत पर और अधिक टैरिफ लगाता है, तो यह भारत के निर्यात, आईटी सेक्टर और फार्मा उद्योग को प्रभावित कर सकता है।
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