Raipur Railway Crossing: कोटा रेलवे क्रॉसिंग को बंद करने की तैयारी तेज हो गई है, लेकिन फाटक बंद करने के फैसले से पहले कोई वैकल्पिक मार्ग प्रदान नहीं किया गया है। इस क्रॉसिंग से रोजाना लगभग 10 से 12 हजार स्टूडेंट्स, व्यापारी और अन्य वर्ग के लोग गुजरते हैं, जो इस बंदी से भारी प्रभावित होंगे। स्थानीय लोग रेलवे प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि जब तक नया रास्ता नहीं खुलता, तब तक फाटक बंद न किया जाए।
रायपुर रेल मंडल के DRM दयानंद ने स्पष्ट किया है कि फाटक बंद करने का कोई अंतिम फैसला अभी नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा, “तकनीकी सर्वेक्षण के बाद ही कोई कदम उठाएंगे। फिलहाल हम वैकल्पिक मार्ग की तलाश कर रहे हैं और 10 से 15 दिनों के भीतर इस पर नतीजा आएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि बंद होने के बाद विकल्प के रूप में ROB (रोड ओवर ब्रिज) या RUB (रोड अंडर ब्रिज) बनाए जाने की योजना है।
हालांकि, कोटा फाटक पर ROB बनाना संभव नहीं है। RUB की संभावना भी कम है क्योंकि फाटक के दोनों तरफ घर बने होने के कारण पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा RUB के दोनों छोर की ठीक-ठाक लंबाई जरूरी होती है, नहीं तो बारिश के मौसम में पानी भरने का खतरा रहता है।
इस क्रॉसिंग का सबसे ज्यादा प्रभाव निकटवर्ती शैक्षणिक संस्थानों जैसे NIT रायपुर, साइंस कॉलेज, आयुर्वेद कॉलेज और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के छात्रों पर पड़ेगा। रोजाना हजारों छात्र इस मार्ग से होकर स्कूल और कॉलेज आते-जाते हैं। फाटक बंद होने पर छात्रों को लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा, जिससे समय और यातायात व्यय दोनों बढ़ेंगे।
स्थानीय व्यापारी भी फाटक बंद होने से आपूर्ति और ग्राहक पहुंच में बाधा आने की आशंका जता रहे हैं। इससे व्यापारिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
कोटा रेलवे क्रॉसिंग का अस्तित्व एक लंबे जन संघर्ष का परिणाम है। 1990 के दशक में पूर्व पार्षद स्वर्गीय किशोर साहू ने इस सड़क के निर्माण के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर आंदोलन किया था। तब यह मार्ग मुख्य सड़क से जुड़े बिना निवासियों के लिए काफी मुश्किल था, क्योंकि उन्हें एनआईटी रायपुर परिसर से होकर गुजरना पड़ता था। इस संघर्ष ने स्थानीय जनता के लिए एक महत्वपूर्ण आवाज़ उठाई थी।
DRM दयानंद ने कहा कि फाटक बंद होने के बाद दोपहिया वाहन और पैदल यात्रियों के लिए क्रॉसिंग पार करने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है। यह तकनीकी सर्वेक्षण के आधार पर तय होगा, जिसमें लगभग 10 दिन लग सकते हैं। फिलहाल इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
रेलवे प्रशासन की योजना है कि शहरों की सीमा के भीतर स्थित लगभग सभी रेलवे क्रॉसिंग को 2027 तक बंद कर दिया जाएगा। कोटा क्रॉसिंग का बंद होना इसी योजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य यातायात को सुगम बनाना और दुर्घटनाओं को रोकना है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त वैकल्पिक मार्गों का होना आवश्यक है।
कोटा रेलवे क्रॉसिंग बंद होने से रायपुर के हजारों लोगों का आवागमन प्रभावित होगा। रेलवे प्रशासन द्वारा समय पर वैकल्पिक रास्ते न मिलने की स्थिति में जनता को भारी असुविधा झेलनी पड़ सकती है। इसलिए तकनीकी सर्वेक्षण के साथ-साथ प्रभावी और शीघ्र विकल्प विकसित करना आवश्यक है।
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