Pakistan Air Pollution : पड़ोसी देश पाकिस्तान में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। पंजाब प्रांत के कई शहर जहरीले स्मॉग की चपेट में हैं। सबसे खराब हालात लाहौर में देखने को मिल रहे हैं, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। शहर के कई इलाकों में AQI 800 के पार दर्ज किया गया है। इस स्थिति ने स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है।
दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हुआ लाहौर
लाहौर में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि शहर दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की सूची में पहले स्थान पर पहुंच गया है। शहर का समग्र AQI 530 के पार बताया जा रहा है। सुबह से लेकर शाम तक आसमान में धुंध की मोटी परत दिखाई दे रही है। लोगों को खुले वातावरण में सांस लेने में परेशानी हो रही है। जहरीली हवा के कारण आंखों में जलन, खांसी और सांस संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ गया है।

लाहौर के कई इलाकों में AQI 800 के पार
प्रदूषण की भयावह स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लाहौर के अलग-अलग इलाकों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब दर्ज की गई है। इकबाल टाउन में AQI 836, समनाबाद में 828 और गुलबर्ग में 822 तक पहुंच गया है। वहीं बरकी रोड पर 798 और मॉडल टाउन में 748 का स्तर दर्ज किया गया।

इसके अलावा कैंट में AQI 652, डिफेंस में 622, पाइन एवेन्यू और आसपास के क्षेत्रों में 621, इस्लामपुरा में 611, शादमान में 561 और जौहर टाउन में 541 दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रदूषण की समस्या केवल शहर के किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं है।
बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर बढ़ा खतरा
जहरीले स्मॉग के बीच बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण फेफड़ों और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे वातावरण में लंबे समय तक रहने से अस्थमा, सांस लेने में परेशानी और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

पाकिस्तान का प्रदूषण दिल्ली-NCR तक कैसे पहुंचेगा?
पाकिस्तान में बढ़ते वायु प्रदूषण का असर भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों पर भी पड़ सकता है। सर्दियों के दौरान उत्तर भारत और पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में हवा की दिशा कई बार उत्तर-पश्चिमी हो जाती है। ऐसी मौसमी परिस्थितियों में पाकिस्तान के लाहौर, फैसलाबाद और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले प्रदूषक भारतीय पंजाब और हरियाणा की ओर बढ़ सकते हैं।
यदि हवा की दिशा और गति अनुकूल रहती है, तो प्रदूषण के कण आगे चलकर दिल्ली-NCR तक भी पहुंच सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक असर मौसम की परिस्थितियों, हवा की दिशा और प्रदूषकों के फैलाव पर निर्भर करेगा।
भारत और पाकिस्तान का साझा एयरशेड बढ़ा सकता है चिंता
भारत और पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र इंडो-गंगा के मैदान के साझा एयरशेड का हिस्सा हैं। इसका मतलब है कि एक क्षेत्र में पैदा होने वाला वायु प्रदूषण अनुकूल परिस्थितियों में दूसरे क्षेत्र की हवा को भी प्रभावित कर सकता है।
सर्दियों में तापमान कम होने और हवा की रफ्तार धीमी पड़ने से प्रदूषक वातावरण में लंबे समय तक जमा रह सकते हैं। ऐसे में दिल्ली-NCR की पहले से प्रदूषित हवा की गुणवत्ता और बिगड़ने की आशंका हो सकती है।
दिल्ली-NCR के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह स्थिति?
दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान प्रदूषण पहले से ही एक बड़ी चुनौती रहता है। पराली जलाने, वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक उत्सर्जन के कारण वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है। ऐसे में सीमा पार से आने वाले प्रदूषक अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकते हैं।
हालांकि, केवल लाहौर के AQI के आधार पर दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए हवा की वास्तविक दिशा, मौसम संबंधी आंकड़ों और प्रदूषण के स्रोतों का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है। फिलहाल पाकिस्तान में बिगड़ते हालात ने पूरे उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में वायु प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
Read More : Ambikapur News : पटवारियों का आक्रोश, नोटिस की प्रतियां जलाईं, आंदोलन जारी रखने का ऐलान


