Nasser Hospital Attack : गाजा के दक्षिणी हिस्से में स्थित नासर हॉस्पिटल की चौथी मंज़िल पर सोमवार को हुए इजराइली मिसाइल हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई। मारे गए लोगों में तीन पत्रकार भी शामिल हैं, जिनमें अल जजीरा और रॉयटर्स के पत्रकारों की पुष्टि की गई है। यह जानकारी गाजा के हेल्थ मिनिस्ट्री ने दी है।

“डबल-टैप” हमला: रेस्क्यू भी बना जानलेवा
हेल्थ मंत्रालय के मुताबिक, यह हमला एक “डबल-टैप” स्ट्राइक था — यानी पहली मिसाइल के कुछ ही मिनटों बाद दूसरी मिसाइल से फिर हमला किया गया। ऐसे हमलों का उद्देश्य अक्सर रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे लोगों को भी निशाना बनाना होता है, जिससे घायलों की मदद करना बेहद खतरनाक हो जाता है।इस हमले के चलते इलाके में भारी अफरा-तफरी मच गई। चश्मदीदों ने बताया कि धमाके के बाद पूरे अस्पताल परिसर में धुआं और मलबा फैल गया, जिससे कई मरीजों और मेडिकल स्टाफ को सुरक्षित स्थान पर शरण लेनी पड़ी।

इजराइल की तरफ से कोई बयान नहीं
हमले के बाद इजराइली डिफेंस फोर्स (IDF) की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, पहले की घटनाओं में इजराइल अस्पतालों पर हमलों को यह कहकर जायज ठहराता रहा है कि वहां हमास के कमांड और कंट्रोल सेंटर मौजूद हैं। इसके बावजूद, लगातार अस्पतालों, पत्रकारों और नागरिक इलाकों पर हो रहे हमले अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की चिंता का विषय बने हुए हैं।
युद्ध का क्रूर आँकड़ा: 62,686 फिलिस्तीनी मारे गए
गाजा हेल्थ मिनिस्ट्री के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 62,686 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं।इनमें से अनुमानतः आधे से अधिक मृतक महिलाएं और बच्चे हैं। इस लगातार जारी संघर्ष में गाजा की स्वास्थ्य सुविधाएं बुरी तरह चरमरा चुकी हैं। अस्पतालों में ना तो दवाएं बची हैं और ना ही बिजली या पानी की समुचित व्यवस्था है।
प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला
तीन पत्रकारों की मौत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स और अन्य मीडिया संस्थाओं ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और स्वतंत्र जांच की मांग की है। नासर हॉस्पिटल पर हुआ यह हमला एक बार फिर गाजा संकट की भयावहता और मानवीय त्रासदी को उजागर करता है। लगातार हो रहे नागरिक और प्रेस पर हमले यह दर्शाते हैं कि यह युद्ध सिर्फ सीमाओं का नहीं, बल्कि सच्चाई, मानवता और जीवन के अधिकार का भी है।
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