Israel Hamas Negotiations : गाज़ा में जारी भयावह मानवीय संकट के बीच, इज़राइली रक्षा बल (IDF) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल इके जमीर ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से हमास के साथ कैदियों की अदला-बदली के समझौते को अंतिम रूप देने की अपील की है। यह बयान ऐसे समय आया है जब युद्ध के चलते 50 से अधिक इज़राइली बंधकों की ज़िंदगियाँ दांव पर लगी हैं, और गाज़ा में अब तक 60,000 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है।

सेना प्रमुख का महत्वपूर्ण बयान
हाइफा नौसैनिक अड्डे के दौरे के दौरान जनरल जमीर ने कहा: “प्रधानमंत्री के पास कैदियों की अदला-बदली को अंतिम रूप देने का अवसर है। सेना इस क्षण को ऐतिहासिक मान रही है और इसे आगे बढ़ाने की सिफारिश करती है। देश की जनता चाहती है कि यह समझौता हो ताकि 50 बंधकों की घर वापसी सुनिश्चित हो सके और यह युद्ध समाप्त हो।” जनरल का यह बयान संकेत देता है कि इज़राइल की सेना, जो अब तक आक्रामक सैन्य रणनीति के लिए जानी जाती रही है, शांति और बंधकों की रिहाई को प्राथमिकता देने के पक्ष में दिख रही है।

नेतन्याहू पर बढ़ता दबाव
प्रधानमंत्री नेतन्याहू इस मुद्दे पर द्विविधा में घिरे हुए हैं। एक ओर वह लगातार गाज़ा में सैन्य कार्रवाई तेज करने का आदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर देश और विदेश से उन पर बंधकों की रिहाई के लिए बातचीत शुरू करने का दबाव भी तेज हो रहा है। शनिवार को तेल अवीव के “होस्टेज स्क्वायर” में नेतन्याहू के खिलाफ एक विशाल प्रदर्शन हुआ, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था:“प्रधानमंत्री सिर्फ बातें करते हैं, लेकिन उनका व्यवहार दिखाता है कि वे बंधकों की कुर्बानी देने को तैयार हैं। उन्हें यह परवाह नहीं कि वे जिंदा लौटते हैं या नहीं।”
50 बंधक: सिर्फ 20 के जीवित होने की संभावना
एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, हमास के कब्जे में करीब 50 इज़राइली बंधक हैं, जिनमें से सिर्फ 20 के ही जीवित होने की संभावना जताई गई है। इसके विपरीत, इज़राइल ने 10,800 से अधिक फिलिस्तीनियों को हिरासत में लिया हुआ है, जिनमें कई महिलाएं और नाबालिग भी शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ा
संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और कई मानवाधिकार संगठनों ने इज़राइल की गाज़ा में की गई सैन्य कार्रवाई को “घोर अमानवीय” करार दिया है। गाज़ा में अकाल, स्वास्थ्य संकट और बड़े पैमाने पर विस्थापन की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। ऐसे में एक मानवीय समझौते की उम्मीद पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को है। लेफ्टिनेंट जनरल जमीर का प्रस्ताव इस बात का संकेत है कि इज़रायली सैन्य तंत्र भी अब स्थायी समाधान और मानवीय पहलुओं को महत्व देने की ओर बढ़ रहा है। सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री नेतन्याहू राजनीतिक दबाव और सार्वजनिक गुस्से के बीच हमास के साथ समझौते की दिशा में कोई ठोस कदम उठाएंगे, या फिर यह युद्ध और बंधकों की त्रासदी यूँ ही जारी रहेगी?
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