Raipur DMF Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित DMF घोटाले (District Mineral Fund Scam) में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को रायपुर, दुर्ग, भिलाई और राजिम में एक साथ बड़ी कार्रवाई की। ईडी की टीम ने करीब 20 घंटे तक छापेमारी कर अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं। यह रेड निलंबित IAS अधिकारी रानू साहू और अन्य अधिकारियों से जुड़े 575 करोड़ से ज्यादा के घोटाले की जांच के तहत की गई है।

किन-किन के ठिकानों पर छापे?
ईडी की टीमें कारोबारी विनय गर्ग, पवन पोद्दार और सतपाल छाबड़ा सहित कृषि उपकरण सप्लाई से जुड़े कारोबारियों, ठेकेदारों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के ठिकानों पर पहुंचीं।

भिलाई-3 के वसुंधरा नगर में अन्ना एग्रो टेक प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तर पर रेड हुई।

शांति नगर में सीए आदित्य अग्रवाल के घर से डिजिटल डिवाइस जब्त की गई।
राजिम में उगम राज कोठारी के घर और दुकान को सील कर दस्तावेजों की जांच की गई।
क्या है DMF घोटाला?
ED और EOW की जांच में खुलासा हुआ है कि District Mineral Fund (DMF) के तहत आने वाली राशि को फर्जी टेंडरों, प्रोजेक्ट्स और सप्लाई के नाम पर गलत तरीके से खर्च किया गया।
कृषि उपकरण, ट्रेनिंग, खेल सामग्री और मेडिकल उपकरण जैसे प्रोजेक्ट में मोटा कमीशन वसूला गया।
IAS रानू साहू पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए टेंडर प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी की।
फर्जी NGO और एजेंसियों के जरिए नेताओं और अफसरों तक कमीशन पहुंचाया गया।
कमीशन की दरें भी तय थीं
जांच में सामने आया है कि DMF फंड से जुड़ी परियोजनाओं में कलेक्टर को 40%, CEO को 5%, SDO को 3% और सब इंजीनियर को 2% कमीशन मिलता था। नियमों में बदलाव कर लाभकारी टेंडर तय अधिकारियों और नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए जारी किए गए।
कौन-कौन घोटाले में शामिल?
ED की रिपोर्ट के मुताबिक, संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, ऋषभ सोनी, और दलाल मनोज द्विवेदी, पियूष सोनी, पियूष साहू, अब्दुल और शेखर जैसे नाम जांच के घेरे में हैं।
क्या मिला छापे में?
ED को छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट, फर्जी बिल, और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मिले हैं। एजेंसी का दावा है कि इन सबूतों के आधार पर आगे और भी कारोबारी और नेताओं पर शिकंजा कस सकता है।
छत्तीसगढ़ में DMF फंड में हुए करोड़ों के घोटाले की परतें अब खुलती जा रही हैं। ईडी की ताजा कार्रवाई से साफ है कि इस घोटाले में प्रशासन, कारोबार और राजनीति के गठजोड़ की गहरी जड़ें हैं। आने वाले दिनों में और भी बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
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