US tariff policy 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक नया कार्यकारी आदेश जारी करते हुए बड़ी आर्थिक घोषणा की है। इस आदेश के तहत अमेरिका उन व्यापारिक साझेदार देशों को टैरिफ से छूट देगा, जो अमेरिका के साथ औद्योगिक निर्यात समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। यह छूट खासतौर पर उन वस्तुओं पर लागू होगी, जिन्हें अमेरिका में या तो पैदा नहीं किया जा सकता या जिनका घरेलू उत्पादन बेहद सीमित है।

किन देशों को मिलेगा फायदा?
इस टैरिफ छूट का लाभ अमेरिका के “अलाइंड पाटनर्स” यानी सहयोगी देशों को मिलेगा, जो अमेरिका के साथ फ्रेमवर्क ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करेंगे। इनमें जापान, यूरोपीय संघ जैसे मौजूदा सहयोगी शामिल हैं। आदेश के मुताबिक, 45 से अधिक उत्पाद श्रेणियों पर शून्य आयात शुल्क लगेगा। छूट सोमवार रात 12 बजे से प्रभावी हो गई है।

किन चीजों पर मिलेगी छूट?
व्हाइट हाउस के अनुसार, यह टैरिफ छूट औद्योगिक और रणनीतिक महत्व वाली चीजों पर लागू होगी: निकेल और ग्रेफाइट: खासतौर पर स्टेनलेस स्टील और इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरियों के निर्माण में काम आते हैं। सोना: पाउडर, पत्तियों और बुलियन रूप में शामिल। फार्मास्युटिकल कंपाउंड्स: जैसे लिडोकेन और मेडिकल टेस्टिंग में इस्तेमाल होने वाले रियाजेंट्स। केमिकल्स और विशेष कृषि उत्पाद, जिनका घरेलू विकल्प नहीं है। एयरक्राफ्ट और उनके पुर्जे, साथ ही गैर-पेटेंटेड दवाएं भी छूट की सूची में हैं।
व्यापार समझौतों के बिना नहीं मिलेगी राहत
इस छूट का लाभ केवल उन देशों को मिलेगा जो अमेरिका के साथ “टैरिफ म्युचुअल रिडक्शन” यानी पारस्परिक शुल्क में कटौती के लिए सहमत होंगे। समझौते के बाद संबंधित देश बिना किसी नए आदेश के यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) और अन्य एजेंसियों के माध्यम से छूट का लाभ उठा सकेंगे।
कुछ पुरानी छूटें खत्म
नई नीति के तहत ट्रंप प्रशासन ने कुछ पुरानी टैरिफ छूटों को भी रद्द कर दिया है। इनमें प्लास्टिक और पॉलीसिलिकॉन शामिल हैं, जो सोलर पैनल निर्माण में उपयोग होते हैं। इसका मकसद है अमेरिका के घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देना।
क्या होगा असर?
इस फैसले से अमेरिका को तीन प्रमुख लाभ मिलने की उम्मीद है: वैश्विक व्यापार में फिर से संतुलन बनेगा। अमेरिकी व्यापार घाटे को नियंत्रित किया जा सकेगा।रणनीतिक संसाधनों पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योगों को मजबूती मिलेगी। हालांकि, स्विट्जरलैंड जैसे कुछ देश जो अमेरिका से समझौता नहीं कर पाए हैं, अब भी 39% तक के आयात शुल्क का सामना करेंगे।
ट्रंप का यह नया आदेश वैश्विक व्यापार नीति में बड़ा बदलाव लेकर आया है। यह कदम न केवल अमेरिका के लिए आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उसके सहयोगी देशों के साथ रिश्तों को भी नई दिशा देगा। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि कितने देश अमेरिका के प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर करते हैं और वैश्विक व्यापार प्रणाली में यह बदलाव कैसे असर डालता है।
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