Bihar Politics 2025 : बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज़ हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव की हालिया यात्रा को लेकर केंद्रीय मंत्री और बिहार के कद्दावर भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “तेजस्वी यादव अब अपना राजनीतिक वजूद तलाश रहे हैं।”

गिरिराज सिंह ने तंज कसते हुए कहा, “जब तेजस्वी राहुल गांधी के साथ यात्रा कर रहे थे, तब उन्हें यह एहसास ही नहीं हुआ कि उनका खुद का राजनीतिक अस्तित्व संकट में पड़ गया है। राहुल गांधी तो अपनी यात्रा के जरिए खुद को स्थापित करने निकले थे, लेकिन तेजस्वी को यह समझ नहीं आया कि वे उनकी छाया बनकर रह गए।”

“एक और यात्रा की जरूरत क्यों पड़ी?”
तेजस्वी यादव की एक और यात्रा की घोषणा पर सवाल उठाते हुए गिरिराज सिंह ने कहा, “अभी कुछ ही दिन पहले उन्होंने यात्रा की थी, तो फिर से यात्रा करने की जरूरत क्या थी? ये जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि राहुल गांधी के साथ जुड़कर उनका वजूद और कमजोर हो गया है। राहुल गांधी ने अपने हित के लिए तेजस्वी जैसे नेताओं के राजनीतिक आधार को भी छीन लिया है।” उन्होंने आगे कहा कि “अब विपक्ष के नेताओं में आपसी संघर्ष और अस्तित्व की लड़ाई शुरू हो गई है। एक-दूसरे के वोटबैंक और पहचान को खत्म करने की राजनीति चल रही है।”
तेजस्वी यादव की ‘जन संवाद यात्रा’ पर निगाहें
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने हाल ही में ‘जन संवाद यात्रा’ की शुरुआत की है, जिसके तहत वे राज्य भर में लोगों से सीधा संवाद कर रहे हैं। यह यात्रा आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में देखी जा रही है। तेजस्वी यादव ने बेरोजगारी, महंगाई और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी बात लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया है। हालांकि भाजपा और एनडीए के नेताओं का दावा है कि यह यात्रा केवल “राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कोशिश” है।
गिरिराज सिंह की राजनीति में आक्रामक शैली
गिरिराज सिंह अपने स्पष्ट और आक्रामक बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि “बिहार की जनता अब जान चुकी है कि विपक्ष के पास कोई ठोस एजेंडा नहीं है। केवल यात्राओं और भाषणों से राजनीति नहीं चलती। विकास, स्थिरता और सुशासन की राजनीति ही अब लोगों की प्राथमिकता है, जिसे भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दे रहे हैं।”
तेजस्वी यादव की यात्रा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी ने बिहार की सियासत को गरमा दिया है। गिरिराज सिंह के इस बयान से यह स्पष्ट है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा विपक्ष को “नेतृत्व संकट” और “वजूद की लड़ाई” जैसे मुद्दों पर घेरने की रणनीति बना रही है।
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