Ladakh Protest 2025: लद्दाख में बीते कई दिनों से चल रहे जन आंदोलन में आज एक बड़ा मोड़ आया जब प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की। सोनम पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर थे और उन्हें आज लेह के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। झड़प और हिंसा के बाद लिया फैसला आज लेह में उस समय स्थिति बिगड़ गई जब सोनम वांगचुक के समर्थन में चल रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। घटनास्थल पर पत्थरबाजी, आगजनी और तोड़फोड़ हुई। भीड़ ने भाजपा कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की और पुलिस वाहन को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान दो वरिष्ठ कार्यकर्ता – शेरिंग आंगचुक (72) और ताशी डोलमा (60) की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालात बेकाबू होते देख सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया, ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो। क्या हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें? सोनम वांगचुक और लद्दाख के स्थानीय नागरिक 35 दिन के भूख हड़ताल अभियान से जुड़े थे। इस जन आंदोलन की मुख्य मांगें हैं: लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। केंद्र शासित प्रदेश को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए, जिससे जनजातीय दर्जा और विशेष संवैधानिक अधिकार प्राप्त हो सकें।यह आंदोलन लद्दाख के जल, जमीन और रोजगार जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर चल रहा है। वांगचुक और लेह एपेक्स बॉडी का कहना है कि बिना संवैधानिक सुरक्षा के लद्दाख की संस्कृति, पर्यावरण और जनसंख्या संरचना खतरे में पड़ जाएगी। हालात पर प्रशासन सख्त स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए प्रशासन ने CRPF की अतिरिक्त टुकड़ियों को लेह में तैनात किया है। इंटरनेट सेवाओं को आंशिक रूप से बंद कर दिया गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में धारा 144 लागू कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है, वहीं लेह एपेक्स बॉडी और वांगचुक समर्थकों ने कहा है कि आंदोलन संवैधानिक और शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगा। सोनम वांगचुक द्वारा भूख हड़ताल खत्म करना भले ही एक अंतरिम निर्णय हो, लेकिन इससे यह साफ है कि लद्दाख की जनता अपनी संवैधानिक मांगों को लेकर गंभीर और जागरूक है। केंद्र सरकार के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर संवाद की पहल करे और स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए। Read More: Naxalite Surrender: दंतेवाड़ा में 71 नक्सलियों का बड़ा सरेंडर, नक्सलवाद के खात्मे की ओर एक और मजबूत कदम
















