AFSPA Eextended: केंद्र सरकार ने मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) को आगामी छह महीनों के लिए बढ़ा दिया है। यह निर्णय मौजूदा कानून व्यवस्था की चिंताजनक स्थिति को देखते हुए लिया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, AFSPA की अवधि 1 अक्टूबर 2025 से छह महीनों तक लागू रहेगी।

मणिपुर में स्थिति गंभीर
मणिपुर में यह कानून पूरे राज्य में लागू रहेगा, सिवाय उन 13 थाना क्षेत्रों को छोड़कर जो पांच जिलों में स्थित हैं। इन क्षेत्रों में इम्फाल वेस्ट के इम्फाल, लम्फल, सिटी, सिंगजामेई, पटसोई, वांगोई; इम्फाल ईस्ट के पोरोमपट, हेंगांग, इरिलबुंग; थौबल जिले का थौबल थाना, बिष्णुपुर का बिष्णुपुर व नंबोल थाना और ककचिंग जिले का ककचिंग थाना शामिल हैं।

गौरतलब है कि मणिपुर मई 2023 से जातीय हिंसा से जूझ रहा है, जिसमें अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इसी वर्ष 13 फरवरी को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया, जब मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया था।
नागालैंड और अरुणाचल में भी AFSPA जारी
नागालैंड में यह कानून नौ जिलों और पांच अन्य जिलों के 21 थाना क्षेत्रों में लागू किया गया है। वहीं, अरुणाचल प्रदेश में तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों के साथ-साथ नामसाई जिले के असम सीमा से सटे तीन थाना क्षेत्रों को ‘डिस्टर्ब्ड एरिया’ घोषित किया गया है।
AFSPA: विवादों से घिरा कानून
AFSPA, 1958 में लागू किया गया था, जो केंद्र सरकार को किसी भी क्षेत्र को “अशांत क्षेत्र” घोषित करने का अधिकार देता है। इस कानून के तहत सशस्त्र बलों को गिरफ्तारी, तलाशी और यहां तक कि संदेह के आधार पर गोली चलाने का भी अधिकार प्राप्त होता है। मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा इसे एक “कठोर” और “मानवाधिकार विरोधी” कानून बताया जाता रहा है।
क्या है आगे का रास्ता?
AFSPA का विस्तार एक बार फिर यह दर्शाता है कि पूर्वोत्तर भारत में शांति स्थापना अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। केंद्र सरकार द्वारा कानून व्यवस्था की स्थिति की समय-समय पर समीक्षा के बाद ही इस अधिनियम को हटाने या संशोधित करने पर विचार किया जाएगा AFSPA का विस्तार सरकार की सुरक्षा और नियंत्रण बनाए रखने की मंशा को दर्शाता है, लेकिन यह स्थानीय लोगों के बीच भय और असंतोष का कारण भी बनता है। आने वाले महीनों में इन क्षेत्रों में हालात कितने सुधरते हैं, इसी पर निर्भर करेगा कि यह कानून भविष्य में बना रहेगा या नहीं।
Read More : I Love Mohammad Controversy पर मौलाना अल्हामूमी का बड़ा बयान – बोले, “20 करोड़ मुसलमानों पर दर्ज करो केस”











