क्या महादेव सट्टा ऐप से जुड़ी वायरल चैट किसी बड़ी राजनीतिक साजिश की ओर इशारा कर रही है? इस मामले में दो यूट्यूबर्स पर FIR दर्ज होने के बाद जांच और तेज हो गई है, जबकि भूपेश बघेल पर लगाए गए आरोपों ने पूरे राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।
क्या महादेव सट्टा ऐप से जुड़ी वायरल चैट किसी बड़ी राजनीतिक साजिश की ओर इशारा कर रही है? इस मामले में दो यूट्यूबर्स पर FIR दर्ज होने के बाद जांच और तेज हो गई है, जबकि भूपेश बघेल पर लगाए गए आरोपों ने पूरे राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।

Mahadev Betting App : महादेव सट्टा ऐप के संचालक सौरभ चंद्राकर के कथित इंस्टाग्राम अकाउंट और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम से जुड़ी एक बातचीत का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर इन दिनों तेजी से वायरल हो रहा है। इस कथित चैट में भूपेश बघेल के नाम से एक मैसेज दिख रहा है, जिसमें कथित तौर पर सौरभ चंद्राकर से उनका नंबर मांगा गया है। इस वायरल कंटेंट के सामने आते ही राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह ‘फर्जी’ और ‘फोटोशॉप’ की गई साजिश बताया है। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए साफ किया है कि ऐसी कोई बातचीत कभी नहीं हुई और यह जनता को गुमराह करने का एक कुत्सित प्रयास है।



भूपेश बघेल ने इस मामले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि इस तरह की भ्रामक खबरें फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लीगल टीम फर्जी जानकारी प्रसारित करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठा रही है। इस घटना के विरोध में बुधवार को बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता भिलाई-3 थाने पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की और पूर्व मुख्यमंत्री की छवि धूमिल करने के प्रयास में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह उनके वरिष्ठ नेता को बदनाम करने की एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा दी गई शिकायत के बाद पुलिस हरकत में आई है। भिलाई-3 थाने में ज्ञापन सौंपे जाने के उपरांत पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। छावनी सीएसपी प्रशांत पैकरा ने जानकारी दी कि शिकायत के आधार पर दो यूट्यूबर्स, सागर साहू और पुष्पराज सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में यह मामला तकनीकी जांच के अधीन है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुरूप आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


यह पूरा घटनाक्रम डिजिटल युग में सूचनाओं की विश्वसनीयता और उनके दुरुपयोग के बड़े संकट को दर्शाता है। एक तरफ जहां पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर यह फर्जी स्क्रीनशॉट कहां से और किसके द्वारा बनाया गया, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस इसे आगामी राजनीतिक हितों को प्रभावित करने वाली कार्रवाई मान रही है। पूर्व सीएम द्वारा अपनी छवि को लेकर दिखाई गई सख्ती ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं हैं। अब सबकी निगाहें पुलिस की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह स्पष्ट करेगी कि इसके पीछे असल साजिशकर्ता कौन हैं। इस बीच, सोशल मीडिया पर चल रही इस बहस ने महादेव सट्टा ऐप से जुड़े विवादों को एक बार फिर से सुर्खियों में ला खड़ा किया है।
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