भोजपुर एनकाउंटर मामले ने पूरे बिहार में हलचल मचा दी है, अब इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिससे पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और आने वाले दिनों में बड़ा न्यायिक फैसला सामने आ सकता है
भोजपुर एनकाउंटर मामले ने पूरे बिहार में हलचल मचा दी है, अब इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिससे पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और आने वाले दिनों में बड़ा न्यायिक फैसला सामने आ सकता है

Bhojpur Encounter : बिहार के भोजपुर जिले में हुए एक विवादास्पद पुलिस एनकाउंटर का मामला अब तूल पकड़ चुका है। इस घटना में 28 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक भरत भूषण तिवारी की मौत ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा कर दिया है। अब यह मामला कानूनी गलियारों में पहुँच गया है, जहाँ इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता गौरव द्विवेदी ने पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ईमेल और पत्र लिखकर इस मामले में जनहित याचिका (PIL) दायर की है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि वह इस कथित फर्जी एनकाउंटर का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) ले और मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच के आदेश दे, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

अधिवक्ता गौरव द्विवेदी ने अपनी याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसलों, विशेषकर ‘PUCL बनाम महाराष्ट्र राज्य (2014)’ का हवाला दिया है। उन्होंने मांग की है कि घटना में शामिल सभी दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनिवार्य रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए। याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राज्य पुलिस पर भरोसा करना मुश्किल है, इसलिए इस पूरे मामले की जांच या तो सीबीआई को सौंपी जाए या फिर पटना हाईकोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच दल (SIT) द्वारा कराई जाए। इससे न केवल पारदर्शिता बनी रहेगी, बल्कि न्याय की उम्मीद भी बढ़ेगी।

याचिका में अदालत से यह भी आग्रह किया गया है कि वे प्रशासन को निर्देश दें कि घटना से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को तत्काल सुरक्षित किया जाए और उन्हें कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इसमें भोजपुर एसपी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति, घटना के समय की आधिकारिक पुलिस लॉगबुक, मृतक का विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड्स शामिल हैं। ये दस्तावेज इस एनकाउंटर की वास्तविकता को उजागर करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। इसके अतिरिक्त, अधिवक्ता ने पीड़ित परिवार की अत्यंत दयनीय आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से उन्हें तत्काल अंतरिम वित्तीय मुआवजा देने और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
याचिका में इस घटना को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21, जो हर नागरिक को ‘जीने का अधिकार’ प्रदान करता है, का खुला उल्लंघन बताया गया है। अधिवक्ता ने अपनी दलीलों में कहा है कि यदि कानून के रक्षक ही कानून को अपने हाथों में लेने लगें और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के एनकाउंटर करने लगें, तो न्यायपालिका का हस्तक्षेप अनिवार्य हो जाता है। यह पुलिस बल की शक्तियों का सरासर दुरुपयोग है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा है।
यह घटना भोजपुर जिले के शाहपुर थाना अंतर्गत बिलौटी गांव में 16 और 17 जून की रात को हुई थी, जहाँ बिहार पुलिस ने भरत भूषण तिवारी नामक युवक का एनकाउंटर कर दिया था। पुलिस के दावों और स्थानीय लोगों व परिजनों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के बीच भारी विरोधाभास है। परिजनों का आरोप है कि भरत भूषण मानसिक रूप से अस्वस्थ था और पुलिस ने उसे निशाना बनाया है। इस घटना के बाद से ही बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, और अब पटना हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से ही पीड़ित परिवार को न्याय की आस है।

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