US Iran Conflict : शुक्रवार का दिन मध्य-पूर्व की राजनीति के लिए काफी गहमागहमी भरा रहा। एक तरफ वाशिंगटन में अमेरिका, इजराइल और लेबनान के बीच त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए जा रहे थे, जो क्षेत्र में शांति की नई उम्मीद जगा रहा था। वहीं दूसरी तरफ, दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक धमनियों में से एक, होर्मुज स्ट्रेट में ईरान ने एक कार्गो जहाज को निशाना बना दिया। इस घटना ने क्षेत्र में तनाव को एक बार फिर से चरम पर पहुंचा दिया है। जहाज पर ईरान के हमले के तुरंत बाद अमेरिका ने आक्रामक रुख अपनाते हुए ईरानी मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर बमबारी कर दी। जवाबी कार्रवाई में ईरानी सेना (IRGC) ने भी मध्य-पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं।

वाशिंगटन में शांति की उम्मीद और जमीनी हकीकत
वाशिंगटन में चार दिनों तक चली गहन वार्ता के बाद शुक्रवार को अमेरिका, इजराइल और लेबनान ने एक त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क समझौते को अंतिम रूप दिया। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य इजराइल और लेबनान के बीच लंबे समय से चले आ रहे दुश्मनी के दौर को खत्म कर स्थायी शांति और सुरक्षा की नींव रखना है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस समझौते को एक ऐतिहासिक शुरुआत बताते हुए कहा कि यह मध्य-पूर्व में स्थिरता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। लेकिन इस कूटनीतिक जीत की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि होर्मुज स्ट्रेट से आई खबर ने सब कुछ धूमिल कर दिया।

हिंसा का जवाब हिंसा से: जेडी वेंस की चेतावनी
इस घटना के बाद अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बेहद सख्त तेवर अपनाए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि हिंसा का जवाब अब हिंसा से ही दिया जाएगा। वेंस ने कहा, ‘ईरान ने जिस सीजफायर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं, हम उसका सम्मान करते हैं, लेकिन अगर वे इसका उल्लंघन करेंगे, तो समझौता बेमानी हो जाएगा।’ उन्होंने कहा कि यदि समझौते को लागू करने में कोई मतभेद था, तो वे कूटनीतिक चैनलों के जरिए स्पष्टीकरण मांग सकते थे, न कि हमले कर सकते थे। वेंस का यह बयान साफ संकेत देता है कि अमेरिका अब इस मुद्दे पर नरमी बरतने के मूड में नहीं है और ईरान के किसी भी उकसावे का करारा जवाब दिया जाएगा।
सैन्य टकराव की तबाही और आरोप-प्रत्यारोप
होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी हमले के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने त्वरित कार्रवाई की। अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर मिसाइल प्रक्षेपण केंद्रों, ड्रोन बेस और रडार साइटों को सटीक हमलों में निशाना बनाया। रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में ईरान को भारी सैन्य नुकसान हुआ है। इसके जवाब में ईरानी सेना (IRGC) ने एक बयान जारी कर अमेरिका पर ही वादे तोड़ने का आरोप लगाया। ईरान का दावा है कि होर्मुज स्ट्रेट में जिस जहाज को निशाना बनाया गया, वह अनधिकृत तरीके से गुजर रहा था। ईरान ने अपनी आक्रामकता को ‘जवाबी कार्रवाई’ करार देते हुए मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिससे क्षेत्र में पूर्ण युद्ध जैसी स्थिति बन गई है।
टूटे वादे और भविष्य के अनिश्चित आसार
18 जून को अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था, जिसके तहत ईरान ने 60 दिनों तक होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित और शुल्क-मुक्त मार्ग देने का वादा किया था। हाल ही में ईरान और ओमान ने भी जहाज आवाजाही के प्रबंधन के लिए एक संयुक्त कार्य समूह बनाने की बात कही थी। इन तमाम कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद, शुक्रवार की घटना ने सभी वादों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। एक तरफ जहां दुनिया शांति की उम्मीद कर रही थी, वहीं दोनों देशों का अपने हमलों को जायज ठहराना इस बात का संकेत है कि मध्य-पूर्व में तनाव का यह चक्र फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है।











