Cyber Crime : आधुनिक तकनीक का वरदान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक अब समाज के लिए एक गंभीर अभिशाप बनते जा रहे हैं। मध्य प्रदेश से हाल ही में सामने आए दो दिल दहला देने वाले मामलों ने यह साबित कर दिया है कि कैसे तकनीक का गलत इस्तेमाल किसी भी व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं की गरिमा को तार-तार कर सकता है। उज्जैन और भोपाल में घटी इन घटनाओं ने न केवल लोगों को सचेत किया है, बल्कि साइबर सुरक्षा को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। डीपफेक तकनीक के जरिए बनाई गई अश्लील तस्वीरें और वीडियो केवल एक तकनीकी अपराध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित मानसिक प्रताड़ना का जरिया बन चुके हैं।

उज्जैन: पारिवारिक रंजिश और एक ‘अंदरूनी’ साजिश
उज्जैन के पंवासा थाना क्षेत्र में एक MBBS छात्रा डीपफेक तकनीक के क्रूर खेल का शिकार बनी। एक रिश्तेदार ने छात्रा के पिता को समाज में नीचा दिखाने के लिए उसे अपनी साजिश का निशाना बनाया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कृत्य में एक सरकारी BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) की भूमिका भी सामने आई, जिसने सरकारी रिकॉर्ड से छात्रा की फोटो आरोपियों को उपलब्ध कराई। आरोपी ने इस फोटो का उपयोग कर अश्लील डीपफेक वीडियो तैयार किया और उसे गांव के व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल कर दिया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पांच में से चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, हालांकि एक आरोपी अभी भी कानून की पकड़ से दूर है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे डिजिटल युग में सरकारी रिकॉर्ड भी सुरक्षित नहीं हैं और आपसी रंजिशें अब तकनीक के माध्यम से हिंसक रूप ले रही हैं।

भोपाल: प्रतिशोध की आग में झुलसा एक निर्दोष परिवार
भोपाल के करोंद इलाके का मामला प्रतिशोध की भावना का एक डरावना उदाहरण है। एक युवक द्वारा शादी से इनकार करने पर उसकी प्रेमिका ने बदला लेने का जो तरीका अपनाया, उसने पूरे परिवार को बदनामी के दलदल में धकेल दिया। आरोपी युवती ने एआई का उपयोग कर युवक की मां और 18 वर्षीय बहन की अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाए और उन्हें फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए फैला दिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि तस्वीरें वायरल होने के बाद उनकी बेटी गहरे मानसिक अवसाद में है और पूरा परिवार सामाजिक अपमान झेल रहा है। प्रारंभिक स्तर पर स्थानीय थाने से उचित कार्रवाई न मिलने के कारण परिवार को पुलिस कमिश्नर और कलेक्टर का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
साइबर अपराध और एहतियात: आज की सबसे बड़ी जरूरत
ये दोनों मामले समाज को एक कठोर चेतावनी देते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोशल मीडिया पर निजी तस्वीरें साझा करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही, सरकारी या किसी भी अन्य संस्था को दी गई तस्वीरों के दुरुपयोग के प्रति भी जागरूक रहना आवश्यक है। यदि किसी को संदिग्ध कंटेंट या अपनी तस्वीरों का दुरुपयोग होता दिखे, तो बिना देरी किए साइबर सेल में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। एआई के इस दौर में डिजिटल साक्षरता ही एकमात्र बचाव है। इन मामलों में प्रशासन और पुलिस की कड़ी कार्रवाई समय की मांग है, ताकि अपराधियों के हौसले पस्त हों और तकनीक का उपयोग केवल सृजन के लिए हो, न कि किसी की जिंदगी तबाह करने के लिए।










