Ali Khamenei Funeral : इजरायल का डर या रणनीति, पिता अली खामेनेई के जनाजे से आखिर क्यों गायब रहे मोजतबा?

Ali Khamenei Funeral : ईरान के इतिहास में एक युग का अंत हो गया है। 37 वर्षों तक देश की बागडोर संभालने वाले सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को जब सुपुर्द-ए-खाक किया गया, तो वहां का मंजर अत्यंत भावुक था। तेहरान के ग्रैंड मोसाला में उमड़ी लाखों लोगों की भीड़ अपने नेता को आखिरी विदाई देने पहुंची थी। सरकारी अधिकारियों, वैश्विक नेताओं और शोकाकुल नागरिकों के बीच अली खामेनेई के परिवार के सदस्य भी मौजूद थे। उनके तीन बेटे—मुस्तफा, मैसम और मसूद—पिता के ताबूत के पास फूट-फूट कर रोते हुए देखे गए। लेकिन, इस गमगीन माहौल में सबकी निगाहें एक ऐसे चेहरे को तलाश रही थीं, जो अब ईरान का नया सुप्रीम लीडर है—मोजतबा खामेनेई। हालांकि, वह वहां कहीं भी नजर नहीं आए, जिसने ईरान की राजनीति में एक बड़े रहस्य और अटकलों को जन्म दे दिया है।

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28 फरवरी का वह खौफनाक हमला जिसने बदल दी ईरान की तस्वीर

मोजतबा खामेनेई की अनुपस्थिति का कारण जानने के लिए 28 फरवरी की उस काली रात को याद करना जरूरी है, जिसने ईरान को हिला कर रख दिया था। खबरों के मुताबिक, इसी दिन अमेरिका और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से ईरान पर एक बड़ा हमला किया गया था। इस हमले में न केवल अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई, बल्कि मोजतबा के निजी जीवन और उनके परिवार के लिए भी यह एक बड़ी त्रासदी साबित हुई। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस हमले में मोजतबा की पत्नी जहरा हद्दाद आदेल और परिवार के अन्य करीबी सदस्य मारे गए थे। उस घटना के चार महीने बाद भी, मोजतबा का सार्वजनिक रूप से सामने न आना कई तरह के सवालों को जन्म दे रहा है।

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सत्ता परिवर्तन और मोजतबा का नया दायित्व

अली खामेनेई की मृत्यु के मात्र 10 दिनों के भीतर, 8 मार्च को मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना गया। 12 मार्च को उनके नाम से पहला लिखित संदेश प्रसारित हुआ, जिसे सरकारी टीवी एंकर ने पढ़कर सुनाया था। उस संदेश में उन्होंने कड़े लहजे में ‘बदला’ लेने की बात कही थी। तब से अब तक उन्होंने दर्जनों लिखित संदेश जारी किए हैं, लेकिन वे हमेशा परदे के पीछे से ही काम कर रहे हैं। 18 जून को उनका एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने अमेरिका के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत को अपनी मंजूरी दी। यह बयान उनकी पिछली सख्त छवि से अलग था, लेकिन इसने यह साबित किया कि वह अभी भी सत्ता की बागडोर संभाल रहे हैं।

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क्या मोजतबा खामेनेई जीवित भी हैं? उठ रहे हैं बड़े सवाल

मीडिया रिपोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों के बीच मोजतबा की स्थिति को लेकर भारी मतभेद हैं। एएफपी (AFP) की एक रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि 28 फरवरी के बाद से इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं है कि मोजतबा शारीरिक रूप से पूरी तरह सक्रिय या स्वस्थ हैं। दूसरी ओर, रॉयटर्स ने अप्रैल में अपने सूत्रों के हवाले से दावा किया था कि मोजतबा उस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके चेहरे की गंभीर चोटें और कथित रूप से एक पैर खो देने की खबरें भी सामने आईं। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों और अन्य सूत्रों का मानना है कि वे मानसिक रूप से सचेत हैं और ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशासन चला रहे हैं।

सुरक्षा और इजरायली खतरे का साया

मोजतबा के सामने न आने के पीछे ईरान सरकार का आधिकारिक तर्क ‘सुरक्षा’ है। अधिकारियों का मानना है कि इजरायल उन्हें अपना सबसे बड़ा टारगेट मानता है। अगर वह सार्वजनिक रूप से बाहर आते हैं, तो उनकी हत्या की कोशिश की जा सकती है। हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी पुष्टि की थी कि ईरानी अधिकारियों को मोजतबा की सुरक्षा को लेकर भारी चिंता है। वहीं, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में संकेत दिए कि उन्हें मोजतबा की सटीक स्थिति और स्थान की जानकारी हो सकती है, लेकिन उन्होंने इसे सार्वजनिक नहीं किया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि वे उन्हें खत्म कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा न करने का निर्णय लिया।

कमजोर छवि का डर या शारीरिक मजबूरी?

सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी की विशेषज्ञ नेगार मुर्तजावी के अनुसार, मोजतबा का सामने न आना एक सोची-समझी रणनीति भी हो सकती है। उनका मानना है कि यदि वे गंभीर चोटों के साथ सार्वजनिक रूप से आते हैं, तो ईरान की छवि एक ‘कमजोर राष्ट्र’ के रूप में पेश हो सकती है, जो युद्ध के दौरान अपनी शक्ति दिखाना चाहता है। ऐसे में परदे के पीछे से शासन चलाना उनके लिए अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक है। हालांकि, जनाजे में शामिल हुई आम ईरानी महिलाओं का दर्द यह बयां करता है कि देश की जनता अपने नए लीडर को देखने के लिए कितनी आतुर है।

अनिश्चितताओं के बीच ईरान का भविष्य

आज ईरान एक दोराहे पर खड़ा है। एक तरफ देश के सुप्रीम लीडर का निधन हो चुका है, दूसरी तरफ नए लीडर का सार्वजनिक रूप से सामने न आना राजनीतिक अस्थिरता का संकेत दे रहा है। क्या मोजतबा खामेनेई वाकई घायल हैं और अपने घावों के भरने का इंतजार कर रहे हैं? या फिर यह कोई बड़ी राजनीतिक चाल है? इस रहस्य का खुलासा समय के साथ ही होगा। लेकिन फिलहाल, मोजतबा की यह चुप्पी पूरे मध्य-पूर्व में एक भारी तनाव और रहस्य का कारण बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ईरान का यह नया नेतृत्व अपने पिता की विरासत को किस प्रकार संभालता है, या फिर यह नेतृत्व किसी बड़े संकट की आहट है।

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Chandan Das

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