CG Waqf Board : छत्तीसगढ़ में निकाह प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य वक्फ बोर्ड ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आगामी अगस्त माह से प्रदेश में अंतरधार्मिक विवाहों (विशेषकर जहां एक पक्ष गैर-मुस्लिम हो) को लेकर नए नियम लागू होने जा रहे हैं। इन नए नियमों के तहत, यदि कोई मुस्लिम युवक या युवती किसी गैर-मुस्लिम से विवाह करते हैं, तो निकाह पढ़वाने वाले मौलानाओं के लिए वक्फ बोर्ड से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विवाह से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करना और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधियों पर रोक लगाना है।

मौलानाओं का वक्फ बोर्ड में पंजीकरण होगा अनिवार्य
नए नियमों के अंतर्गत निकाह संपन्न कराने वाले सभी मौलानाओं का छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के पास पंजीकृत होना अनिवार्य कर दिया गया है। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि अब तक कई मामलों में बिना उचित पहचान या सत्यापन के निकाह संपन्न करा दिए जाते थे, जिससे बाद में कानूनी जटिलताएं उत्पन्न होती थीं। अब पंजीकरण अनिवार्य होने से उन मौलानाओं की पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी जो अधिकृत रूप से निकाह कराने के लिए योग्य हैं। जो भी मौलाना इस पंजीकरण प्रक्रिया का पालन नहीं करेंगे या बिना अनुमति के अंतरधार्मिक निकाह कराएंगे, उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विवाह के लिए दोनों पक्षों की सहमति और दस्तावेजी प्रक्रिया
वक्फ बोर्ड के नए दिशा-निर्देशों में केवल मौलानाओं का पंजीकरण ही नहीं, बल्कि विवाह करने वाले जोड़ों के लिए भी कड़े मानक तय किए गए हैं। अंतरधार्मिक विवाह करने वाले जोड़ों को अब दोनों पक्षों की लिखित सहमति के साथ-साथ सभी आवश्यक कानूनी दस्तावेजों को प्रस्तुत करना होगा। इन दस्तावेजों के सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाह के लिए अनुमति प्रदान की जाएगी। बोर्ड का मानना है कि यह प्रक्रिया विवाह की पवित्रता को बनाए रखने और भविष्य में होने वाले विवादों को कम करने में सहायक सिद्ध होगी।
पारदर्शी व्यवस्था का दावा: किसी धर्म के खिलाफ नहीं
वक्फ बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह नई व्यवस्था किसी भी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य निकाह की प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और कानूनी रूप से त्रुटिहीन बनाना है। बोर्ड के अनुसार, अंतरधार्मिक विवाहों के दौरान होने वाली अनियमितताओं को रोकने के लिए एक सुव्यवस्थित तंत्र की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। अब इस नियम के लागू होने से विवाहों का एक आधिकारिक रिकॉर्ड भी मेंटेन रहेगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी। बोर्ड ने जोर दिया है कि यह कदम सामाजिक व्यवस्था को मजबूत करने और कानूनी बारीकियों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
अगस्त से प्रभावी होगी नई कानूनी प्रक्रिया
छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने इन नियमों को लागू करने की पूरी तैयारी कर ली है। अगस्त महीने से ये नियम प्रभावी हो जाएंगे, जिसके बाद से प्रदेश में बिना वक्फ बोर्ड के पंजीकरण और अनुमति के अंतरधार्मिक निकाह अमान्य माने जाएंगे। प्रशासन और बोर्ड के अधिकारी निकाह पढ़ने वाले सभी धार्मिक गुरुओं और मौलानाओं को इस संबंध में जागरूक करने की प्रक्रिया भी शुरू कर चुके हैं। इस बदलाव को राज्य में निकाह से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को दुरुस्त करने की दिशा में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है।











