Ram Mandir Trust Meeting: ‘चढ़ावा चोरी लज्जाजनक’, दोषियों को मिलेगी सजा, ट्रस्ट ने बताए बड़े फैसले

राम मंदिर ट्रस्ट की अहम बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में चढ़ावे की कथित चोरी को ‘लज्जाजनक’ बताया गया। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। बैठक में और कौन-कौन से अहम फैसले लिए गए? जानिए पूरी रिपोर्ट।

Ram Mandir Trust Meeting: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर में हुई कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। सोमवार को आयोजित ट्रस्ट की तीन घंटे लंबी चली आपात बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि अब इन दोनों पदाधिकारियों की ट्रस्ट और मंदिर की व्यवस्था में कोई भूमिका नहीं रहेगी। इस घटनाक्रम ने राम भक्तों की आस्था को गहरी चोट पहुंचाई है, जिसके चलते ट्रस्ट ने भविष्य में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है।

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कृष्ण मोहन को सौंपी गई अंतरिम जिम्मेदारी

बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, जब तक किसी स्थायी महामंत्री की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन को कार्यकारी महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कृष्ण मोहन ने पदभार संभालते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे कानून के अनुसार कड़ी सजा दिलाई जाएगी। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रबंधन में कुछ व्यवस्थागत खामियां थीं, जिनका लाभ उठाकर इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को अंजाम दिया गया। कृष्ण मोहन का मुख्य लक्ष्य उन सभी तकनीकी और प्रशासनिक ‘लूपहोल्स’ को दुरुस्त करना है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।

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भ्रामक सूचनाओं का खंडन और मंदिर की संपत्ति का रिकॉर्ड

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने मंदिर की वस्तुओं के गायब होने संबंधी अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही भ्रामक खबरें पूरी तरह निराधार हैं। ट्रस्ट के पास मंदिर की करीब 2,800 वस्तुओं का विधिवत और पंजीकृत रिकॉर्ड मौजूद है। उन्होंने कहा कि रामायण, चरण पादुकाओं और अन्य पवित्र वस्तुओं के संबंध में उठ रहे सवाल बेबुनियाद हैं, और ट्रस्ट जरूरत पड़ने पर इनका सार्वजनिक विवरण पेश करने को तैयार है। उन्होंने राम भक्तों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा रखें।

भविष्य की राह: पारदर्शिता और विश्वास बहाली

गोविंद देव गिरि ने बताया कि एसआईटी (SIT) इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है और 22 जुलाई को ट्रस्ट की अगली बैठक बुलाई गई है, जिसमें जांच की अंतिम रिपोर्ट आने की संभावना है। ट्रस्ट का मानना है कि ‘चोरी तो चोरी ही है’ और छिपे हुए अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास, के. परासरन और अन्य वरिष्ठ सदस्य शामिल हुए। फिलहाल ट्रस्ट का पूरा ध्यान अपनी धूमिल हुई छवि को फिर से सुधारने और समाज का विश्वास पुनः जीतने पर केंद्रित है। कृष्ण मोहन के नेतृत्व में अब मंदिर का प्रबंधन नई नीतियों और मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ आगे बढ़ेगा, ताकि राम मंदिर की पवित्रता और मर्यादा हमेशा अक्षुण्ण बनी रहे।

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Chandan Das

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