Ram Mandir Trust Video : रामचरितमानस से काकभुशुंडि तक, राम मंदिर ट्रस्ट ने सभी वस्तुएं सार्वजनिक कीं

Ram Mandir Trust Video : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। हाल ही में मंदिर में हुई कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद ट्रस्ट की साख पर उठे सवालों के बीच यह फेरबदल किया गया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि अब से ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन अंतरिम रूप से मंदिर प्रबंधन और ट्रस्ट के दैनिक कार्यों की देखरेख करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि दान की गिनती के दौरान हुई चोरी की घटना से ट्रस्ट के सभी सदस्य अत्यंत आहत हैं और इस प्रकरण को बहुत गंभीरता से लिया जा रहा है।

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कीमती दान और वस्तुओं को लेकर फैली भ्रामक सूचनाओं का खंडन

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गोविंद देव गिरि ने मंदिर की दान दी गई वस्तुओं के गायब होने संबंधी सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रस्ट ने उन सभी कीमती वस्तुओं को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया, जिनके चोरी होने की अफवाहें फैलाई जा रही थीं। इनमें सोने की परत चढ़ी ‘रामचरितमानस’, भगवान राम के चरण चिन्ह, हार और काकभुशुंडि जैसे बहुमूल्य दान शामिल थे। उन्होंने कहा कि पूर्व आईएएस अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दान की गई 5 करोड़ मूल्य की रामचरितमानस और अन्य पवित्र वस्तुओं के संबंध में लगाए गए आरोप निराधार हैं। ट्रस्ट के पास वर्तमान में मंदिर की करीब 2,800 वस्तुओं का विधिवत पंजीकृत और सुरक्षित रिकॉर्ड उपलब्ध है, जिसे किसी भी समय सत्यापन के लिए पेश किया जा सकता है।

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पारदर्शिता और जवाबदेही पर ट्रस्ट का जोर

कोषाध्यक्ष ने आम जनता और राम भक्तों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की झूठी और भ्रामक जानकारी से सतर्क रहें। उन्होंने जोर देकर कहा कि मंदिर ट्रस्ट का कार्य अत्यंत पारदर्शिता के साथ चलता है और भविष्य में भी इसे सुनिश्चित किया जाएगा। ट्रस्ट के अनुसार, प्रबंधन में हुई चूक और दान चोरी की यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसे आधार बनाकर पूरे ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना गलत है। अब कृष्ण मोहन के नेतृत्व में ट्रस्ट नई व्यवस्थाओं को लागू करेगा ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति न हो।

राम भक्तों का भरोसा फिर से बहाल करने का संकल्प

इस प्रशासनिक बदलाव के पीछे मुख्य उद्देश्य राम भक्तों के मन में पैदा हुए अविश्वास को समाप्त करना और ट्रस्ट के कामकाज को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। ट्रस्ट का मानना है कि जो भी व्यक्ति इस गबन या चोरी की घटना में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ सदस्यों की उपस्थिति में यह संदेश दिया गया कि मंदिर की पवित्रता और दान की गई वस्तुओं की सुरक्षा ट्रस्ट की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आगामी दिनों में प्रबंधन को लेकर और भी कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल और ऑडिट प्रक्रियाएं अपनाई जा सकती हैं ताकि मंदिर की गरिमा को कोई आंच न आए।

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