Surajpur Elephant Attack : सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के सिंघरा गांव में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने वन विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यहां जंगल के किनारे विचरण कर रहे एक अकेले (लोनर) हाथी को देखकर कुछ युवकों ने न केवल शोर मचाना शुरू किया, बल्कि उसे परेशान भी करना शुरू कर दिया। इनमें से कुछ युवक इस खतरनाक स्थिति का वीडियो बनाने में मग्न थे। युवकों की इस हरकत से हाथी अचानक भड़क गया और उसने आक्रामक रुख अपनाते हुए युवकों का पीछा करना शुरू कर दिया। भारी-भरकम शरीर होने के बावजूद हाथी की फुर्ती देखकर वहां अफरा-तफरी मच गई और युवक अपनी जान बचाने के लिए चप्पल-जूते हाथ में लेकर भागते नजर आए। गनीमत रही कि इस दौरान कोई भी युवक हाथी के हमले की चपेट में नहीं आया और हाथी थोड़ी दूर पीछा करने के बाद जंगल के भीतर वापस चला गया।

वन विभाग की चेतावनी को नजरअंदाज करना बन सकता है जानलेवा
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह दंतैल हाथी पिछले कुछ दिनों से प्रतापपुर वन क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में घूम रहा है। वन विभाग और स्थानीय ‘हाथी मित्र दल’ लगातार ग्रामीणों को हिदायत दे रहे हैं कि वे हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किसी भी स्थिति में उनके करीब जाकर फोटो या वीडियो बनाने का दुस्साहस न करें। इसके बावजूद, कुछ लोग अपनी जिज्ञासा या सोशल मीडिया पर वीडियो डालने के चक्कर में अपनी जान जोखिम में डालने से बाज नहीं आ रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाथियों के व्यवहार का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है और छेड़े जाने पर वे हिंसक हो सकते हैं, जो किसी भी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकता है।

वन मंडलाधिकारी की अपील: हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें
वन मंडलाधिकारी दिलेश्वर साहू ने इस घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए लोगों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, “हम लगातार मुनादी करवा रहे हैं और गांवों में कैंप लगाकर लोगों को हाथियों के सुरक्षित व्यवहार के बारे में जागरूक कर रहे हैं। वन विभाग की टीम लगातार हाथी की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है ताकि मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को रोका जा सके।” उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि उन्हें कहीं भी हाथी दिखाई दे, तो तुरंत वन विभाग या हाथी मित्र दल को सूचित करें। हाथी के नजदीक जाने, उसे छेड़छाड़ करने या उसके साथ सेल्फी लेने की कोशिश करना कानूनन गलत होने के साथ-साथ जानलेवा भी हो सकता है।
मानव-हाथी संघर्ष टालने के लिए जागरूकता ही एकमात्र उपाय
वन विभाग का मानना है कि इस तरह की घटनाएं अक्सर असावधानी और अति-उत्साह के कारण होती हैं। हाथियों के कॉरिडोर और विचरण क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को यह समझना होगा कि वन्यजीवों के साथ उनका शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व तभी संभव है जब वे उनके प्राकृतिक आवास में बाधा न डालें। विभाग की ओर से यह भी कहा गया है कि भविष्य में यदि कोई व्यक्ति वन्यजीवों को उकसाते या परेशान करते हुए पाया जाएगा, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। सूरजपुर प्रशासन का उद्देश्य यही है कि हाथी और ग्रामीण, दोनों ही सुरक्षित रहें और किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान को टाला जा सके। लोगों से यही आग्रह है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और हाथियों के प्रति जिम्मेदारी भरा व्यवहार अपनाएं।
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