WhatsApp Hack : डिजिटल युग में साइबर अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, और अब इसका शिकार पश्चिम बंगाल के लोक निर्माण विभाग (PWD) तथा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (PHE) मंत्री डॉ. अजय कुमार पोद्दार बन गए हैं। सोमवार को डॉ. पोद्दार का आधिकारिक व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया, जिसके बाद साइबर अपराधियों ने उनके संपर्क में मौजूद लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। हैकर्स मंत्री के नंबर का दुरुपयोग कर लोगों को भरोसे में लेकर उनसे तत्काल आर्थिक मदद की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा की पोल खोल दी है और लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

35 हजार रुपये की मांग और फर्जी क्यूआर कोड का जाल
साइबर ठगों ने मंत्री के व्हाट्सएप से उनके परिचितों और शुभचिंतकों को एक सुनियोजित संदेश भेजा है। संदेश में लिखा गया है— “मुझे कुछ अमाउंट की तत्काल आवश्यकता है, मेरा यूपीआई (UPI) फिलहाल काम नहीं कर रहा है। क्या आप सुबह तक के लिए मदद कर सकते हैं?” विश्वास जीतने के बाद, ठगों ने 35 हजार रुपये की मांग करते हुए एक क्यूआर कोड (QR Code) भेजा, ताकि पीड़ित सीधे ऑनलाइन भुगतान कर दें। मंत्री के नाम का इस्तेमाल करने के कारण लोग आसानी से इसे सच मान रहे हैं, जिससे ठगी की संभावना बढ़ गई है।

मंत्री की व्यस्तता के बीच साइबर अपराधियों की सक्रियता
जिस समय यह घटना हुई, डॉ. अजय कुमार पोद्दार कोलकाता में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के कार्यक्रमों और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरे से संबंधित आधिकारिक कार्यों में अत्यधिक व्यस्त थे। अपराधियों ने इस व्यस्तता का फायदा उठाते हुए बड़ी चतुराई से अकाउंट को अपने नियंत्रण में लिया। मंत्री के नाम और प्रभाव का इस्तेमाल कर साइबर ठगों द्वारा की जा रही इस हरकत ने उनके परिचितों और आम जनता के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है।

परिवार ने दी सतर्क रहने की चेतावनी, शुरू हुई कानूनी कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही मंत्री के बेटे और भाजपा नेता केशव पोद्दार ने तुरंत सोशल मीडिया के जरिए लोगों को आगाह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पिता का अकाउंट हैक हो गया है और किसी भी प्रकार के संदेश या पैसे की मांग पर भरोसा न किया जाए। उन्होंने सभी लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह का भुगतान न करें। केशव पोद्दार ने बताया कि इस गंभीर मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई है और साइबर सेल द्वारा दोषियों की पहचान के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
डिजिटल सतर्कता ही साइबर अपराधों से बचाव का एकमात्र रास्ता
यह मामला इस बात को दोहराता है कि व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर किसी भी अनपेक्षित संदेश या आर्थिक लेन-देन के अनुरोध को हल्के में नहीं लेना चाहिए। साइबर अपराधी आए दिन नई तकनीकें अपनाकर लोगों को ठगने का प्रयास कर रहे हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि टू-स्टेप वेरिफिकेशन (2-Step Verification) को हमेशा सक्रिय रखें और किसी भी संदिग्ध लिंक या क्यूआर कोड पर बिना सोचे-समझे भरोसा न करें। मंत्री के साथ हुई यह घटना एक उदाहरण है कि साइबर अपराधी किसी को भी अपना निशाना बना सकते हैं, इसलिए डिजिटल दुनिया में ‘सावधानी ही सुरक्षा’ है।
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