PM Modi Indonesia Visit : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंडोनेशिया दौरे के दौरान वहां की संसद को संबोधित करते हुए एक ऐतिहासिक भाषण दिया। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करना और ‘लोकतंत्र की जननी’ के एक नागरिक के तौर पर वहां उपस्थित होना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है। पीएम मोदी ने इंडोनेशियाई जनता द्वारा दिए गए स्नेह और गर्मजोशी भरे स्वागत के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने इस अनुभव को अविस्मरणीय बताते हुए भारत और इंडोनेशिया के बीच दशकों से चले आ रहे मजबूत सांस्कृतिक और राजनयिक संबंधों पर विशेष बल दिया।

राष्ट्रपति प्राबोवो के साथ साझा की गई अटूट मैत्री
अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ अपनी गहरी दोस्ती का जिक्र करते हुए एक भावुक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने कॉपीराइट के बारे में जो बात कही, उसे आगे बढ़ाते हुए वे यह कहना चाहते हैं कि आपसी सम्मान, स्नेह और दोस्ती की भावनाओं पर कोई कॉपीराइट नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी और राष्ट्रपति प्राबोवो की दोस्ती कॉपीराइट की सभी सीमाओं और बाधाओं से परे है। यह बयान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच के निजी और पेशेवर तालमेल को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान और भारत की विकास नीति
पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजे जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि उन अनगिनत भारतीयों का है जो इंडोनेशियाई लोगों के साथ एक गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं। विकास के एजेंडे पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत ‘विस्तारवाद’ के बजाय ‘विकास’ की नीति में विश्वास रखता है। उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास’ का मंत्र दोहराया और इस बात पर जोर दिया कि भारत आज समावेशी विकास के रास्ते पर चल रहा है, जहां सबकी भागीदारी और सबका कल्याण सर्वोपरि है।

समुद्र: अलगाव नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच एक सेतु
भौगोलिक दूरियों के बावजूद भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंधों की गहराई को समझाते हुए पीएम मोदी ने समुद्र को एक पुल बताया। उन्होंने कहा कि हालांकि हमारी राजधानियां हजारों किलोमीटर दूर हैं, लेकिन समुद्री सीमाएं हमें मात्र 150 किलोमीटर की दूरी पर ला देती हैं। जहां दुनिया के अन्य हिस्सों में समुद्र देशों को अलग करता है, वहीं भारत और इंडोनेशिया के लिए यह कभी अलगाव का प्रतीक नहीं रहा। समुद्र हमेशा हमारे साझा भविष्य के केंद्र में रहा है और यह दोनों सभ्यताओं को जोड़ने वाले एक मजबूत सेतु की तरह कार्य करता है।
साझा इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम की स्वर्णिम यादें
दोनों देशों के स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया को लगभग एक ही समय में आजादी मिली—इंडोनेशिया 1945 में और भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ। उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर इंडोनेशिया के आजादी के आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया था। इस दौरान सम्मानित बीजू पटनायक द्वारा निभाई गई भूमिका को याद करते हुए उन्होंने कहा कि कैसे उन्होंने प्रधानमंत्री सुल्तान शहरिर और उपराष्ट्रपति मोहम्मद हट्टा को सुरक्षित भारत लाकर दोनों देशों के बीच भाईचारे की नींव को और मजबूत किया था।
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