Chhattisgarh Weather : छत्तीसगढ़ में मानसूनी कहर, अगले घंटे कितने भारी पड़ेंगे जानिए

Chhattisgarh Weather : छत्तीसगढ़ में मानसून पूरी तरह मेहरबान है और पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों में झमाझम बारिश दर्ज की गई है। मध्य छत्तीसगढ़ के जिलों में भारी बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण झारखंड और उत्तरी ओडिशा के आंतरिक हिस्सों में बने ‘लो प्रेशर सिस्टम’ के कारण प्रदेश में यह व्यापक वर्षा हो रही है। यह मौसमी प्रणाली अब उत्तरी ओडिशा से होते हुए उत्तरी छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ रही है, जिसके चलते कई क्षेत्रों में तेज बारिश की संभावना बनी हुई है। हालांकि, मौसम विभाग ने राहत की खबर देते हुए अनुमान जताया है कि 8 जुलाई, बुधवार से प्रदेश भर में बारिश की गतिविधियों में थोड़ी कमी आ सकती है।

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बालोद में जमीन धंसी और बिजली गिरने से दुखद मौत

भारी बारिश के चलते प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं। बालोद जिले के गुरुर ब्लॉक के ग्राम भानपुरी में लगातार हो रही वर्षा के कारण एक खेत में जमीन धंसने की घटना घटी, जिससे वहां करीब 20 फीट चौड़ा और 30 फीट गहरा गड्ढा हो गया। इसके अलावा, अंबिकापुर के गांधीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम करम्हा में आकाशीय बिजली गिरने से 65 वर्षीय जयनाथ राम की दर्दनाक मौत हो गई। प्रकृति के इस विकराल रूप ने स्थानीय लोगों में दहशत पैदा कर दी है।

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प्राकृतिक जलस्रोतों का उफान और जनजीवन पर असर

प्रदेश भर में बारिश का असर जलस्रोतों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सरगुजा का लोसंगा नाला खतरे के निशान के करीब उफान पर बह रहा है। वहीं, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के गोमर्डा सेंचुरी क्षेत्र में स्थित माड़ोसिल्ली झरना अपनी पूरी क्षमता के साथ लबालब भर चुका है। दूसरी ओर, जशपुर के घने जंगलों और पहाड़ियों में भारी कोहरे की चादर छाई हुई है, जिससे दृश्यता कम हो गई है। बेमेतरा जिले में स्थिति सबसे अधिक गंभीर बनी हुई है, जहां कई पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बहने के कारण संपर्क टूट गया है। किसानों के लिए यह लगातार बारिश अब परेशानी का सबब बन गई है; कई खेतों में अतिरिक्त जलभराव के कारण धान की बुवाई का कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है।

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अस्पताल की बदहाली: डायलिसिस सेंटर में टपका पानी

बेमेतरा जिला अस्पताल से एक बेहद निराशाजनक तस्वीर सामने आई है, जहाँ बारिश का पानी सीधे डायलिसिस सेंटर की छत से टपकने लगा। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही या बुनियादी ढांचे की कमजोरी के कारण मरीजों को उपचार के दौरान भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। वार्ड में टपकते पानी को इकट्ठा करने के लिए बाल्टियां और टब रखे गए और उन्हीं अव्यवस्थित हालातों के बीच मरीजों का उपचार जारी रखा गया। यह घटना स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। मौसम के इस दौर में नागरिकों को सावधानी बरतने और प्रशासन को राहत कार्यों को तेज करने की तत्काल आवश्यकता है।

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Chandan Das

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