Digvijaya Singh Padayatra: राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित किए गए चंदे में कथित धांधली और चोरी के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) पर तीखे हमले किए हैं। एक समाचार एजेंसी को दिए बयान में दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि वे सनातन धर्म की गहराई को समझते हैं और इसकी रक्षा करना उनका मुख्य मिशन है। उन्होंने घोषणा की कि वे अपनी अंतिम सांस तक आस्था की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। उन्होंने इसे पूरी तरह से गैर-राजनीतिक बताते हुए कहा कि वे इस मुहिम में कारसेवक संतोष दुबे को मुख्य अतिथि के रूप में शामिल करेंगे, जिन्होंने कारसेवा के दौरान अपना बलिदान देने का साहस दिखाया था।

उज्जैन से अयोध्या तक ‘राम पदयात्रा’ का ऐलान
इस विवाद के बीच, दिग्विजय सिंह ने चंदा चोरी के विरुद्ध एक बड़ी पहल की घोषणा की है। उन्होंने उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक एक लंबी पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है। यह पदयात्रा 2 अक्टूबर से शुरू होगी, जिसका मुख्य उद्देश्य राम मंदिर निर्माण के नाम पर हुए कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना है। दिग्विजय सिंह के अनुसार, यह यात्रा पूरी तरह से गैर-राजनीतिक होगी। उनका कहना है कि राम मंदिर ट्रस्ट के नाम पर जो भ्रष्टाचार हुआ है, उसने उनकी और करोड़ों राम भक्तों की आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है।

‘मेरा चंदा वापस करो’ – दान वापसी की मांग
दिग्विजय सिंह ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं भी राम मंदिर के लिए चंदा दिया था। उन्होंने मांग की है कि उनका चंदा उन्हें वापस लौटाया जाए, ताकि वे उसे ‘रामालय ट्रस्ट’ को सौंप सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस के एक निष्ठावान सदस्य हैं और हमेशा रहेंगे, लेकिन भगवान राम उनके इष्ट देव हैं। मंदिर निर्माण से जुड़े इस भ्रष्टाचार के खुलासे ने उन्हें बेहद विचलित किया है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि धर्म के नाम पर चंदे में हुई यह लूट अस्वीकार्य है।

एसआईटी की जांच में खुला सुरक्षा व्यवस्था का काला सच
राम मंदिर चंदा चोरी का यह मामला विशेष जांच टीम (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद और भी गंभीर हो गया है। रिपोर्ट में मंदिर के काउंटिंग रूम की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न उठाए गए हैं। जांच में पता चला है कि मंदिर के कुछ कर्मचारियों ने बेहद चालाकी से नकदी के बंडलों को अपने कपड़ों, जूतों और निजी सामान में छिपाकर बाहर निकाला है। एसआईटी की जांच के संकेत बताते हैं कि यह चोरी महज एक या दो बार की घटना नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित और बार-बार की जाने वाली गतिविधि हो सकती है। इस खुलासे ने मंदिर प्रबंधन की विश्वसनीयता और दान में दी गई राशि की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया है, जिसे लेकर अब पूरे देश में बहस छिड़ गई है।
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