SEBI Mutual Fund Rules : बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने उन म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक बड़ा और स्वागत योग्य कदम उठाया है, जो अपनी यूनिट्स को डीमैट खाते में रखते हैं। अब तक, डीमैट खाते में मौजूद म्यूचुअल फंड यूनिट्स के लिए सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) और सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। सेबी के नए निर्देशों के बाद, अब डीमैट खाताधारक भी इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य निवेशकों के लिए निवेश प्रबंधन को सरल बनाना और उन्हें डिजिटल रूप से अधिक सक्षम बनाना है।

दो चरणों में लागू होंगे नियम, जानें समय-सीमा
सेबी ने इस पूरी व्यवस्था को दो स्पष्ट चरणों में लागू करने का निर्णय लिया है। पहले चरण में, 31 जनवरी 2027 तक ‘यूनिट-आधारित’ सुविधा शुरू की जाएगी, जिससे निवेशक एक निश्चित अंतराल पर म्यूचुअल फंड की तय यूनिट्स को बेचकर पैसे निकाल सकेंगे या उन्हें दूसरी स्कीम में ट्रांसफर कर सकेंगे। इसके बाद, दूसरे चरण में 30 अप्रैल 2027 तक ‘रकम-आधारित’ (अमाउंट-बेस्ड) सुविधा शुरू की जाएगी। इस सुविधा के माध्यम से निवेशक अपनी आवश्यकतानुसार एक निश्चित धनराशि निकालने या ट्रांसफर करने के लिए ऑटोमैटिक निर्देश दे सकेंगे। सेबी ने डिपॉजिटरीज को 31 अक्टूबर तक इन प्रक्रियाओं का विस्तृत विवरण अपनी वेबसाइट पर साझा करने का निर्देश दिया है।

क्या हैं SWP और STP के लाभ?
SWP और STP निवेशकों के लिए निवेश को व्यवस्थित करने के दो बेहतरीन उपकरण हैं। SWP (सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान) निवेशकों को नियमित अंतराल पर अपने म्यूचुअल फंड निवेश से एक निश्चित राशि या निर्धारित यूनिट्स निकालने की अनुमति देता है, जो नियमित आय के लिए उपयोगी है। वहीं, STP (सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान) निवेशकों को एक ही फंड हाउस की एक स्कीम से दूसरी स्कीम में व्यवस्थित तरीके से निवेश ट्रांसफर करने की सुविधा प्रदान करता है। अब तक डीमैट होल्डर्स को ऑटोमैटिक विड्रॉल और ट्रांसफर का विकल्प न मिलने से उन्हें मैनुअल प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ता था, जो अब सरल हो जाएगा।
नॉमिनी के लिए प्रक्रिया हुई बेहद आसान
म्यूचुअल फंड क्षेत्र के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण सुधार ‘असोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया’ (Amfi) द्वारा किया गया है। अब किसी निवेशक की मृत्यु होने पर उनके द्वारा नामित व्यक्ति (नॉमिनी) को यूनिट्स ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया गया है। एम्फी ने पते, नाम और हस्ताक्षर में होने वाली छोटी-मोटी विसंगतियों के नियमों में ढील दी है। अब यदि मृतक के रिकॉर्ड में दर्ज पुराने पते और वर्तमान पते में अंतर पाया जाता है, तो असेट मैनेजमेंट कंपनियां (AMCs) निवेशक द्वारा दिए गए नवीनतम पते के दस्तावेजों को मान्यता दे सकेंगी। ये नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
निवेश प्रबंधन में आएगी पारदर्शिता और सरलता
इन सभी सुधारों का सीधा फायदा आम निवेशकों को होगा। डीमैट खाते में म्यूचुअल फंड यूनिट्स रखना पहले ही सुरक्षित माना जाता था, और अब इसमें SWP व STP जैसी सुविधाएं जुड़ने से यह और भी प्रभावी हो गया है। वहीं, एम्फी द्वारा नॉमिनेशन प्रक्रिया में दी गई ढील से मृतक के उत्तराधिकारियों को मिलने वाली जटिलताओं से राहत मिलेगी। सेबी और एम्फी के ये कदम भारतीय म्यूचुअल फंड बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक प्रभावी पहल हैं।
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