CG High Court Verdict : छत्तीसगढ़ कर्मचारियों की सीनियरिटी पर HC फैसला, तबादले से नहीं खत्म होगी वरिष्ठता

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कर्मचारियों की वरिष्ठता को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल प्रशासनिक कारणों से हुए तबादले के आधार पर किसी कर्मचारी की अर्जित वरिष्ठता समाप्त नहीं की जा सकती। इस फैसले से प्रदेश के कई सरकारी कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है और सेवा नियमों पर नई स्पष्टता आई है।

CG High Court Verdict : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य के कर्मचारियों की वरिष्ठता को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से यह व्यवस्था दी है कि यदि किसी कर्मचारी का स्थानांतरण केवल प्रशासनिक कारणों से किया गया है, तो इस आधार पर उसकी पहले से अर्जित वरिष्ठता या सेवा के वर्षों को समाप्त या प्रभावित नहीं किया जा सकता। यह फैसला उन तमाम कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है जो प्रशासनिक तबादलों के कारण अपनी मूल वरिष्ठता खो रहे थे और पदोन्नति से वंचित हो रहे थे।

वन विभाग के सर्कुलर पर प्रहार

यह पूरा कानूनी विवाद वन विभाग के 31 जुलाई 2014 को जारी किए गए एक विशेष सर्कुलर से जुड़ा हुआ था। इस सर्कुलर के तहत एक वन वृत्त से दूसरे वन वृत्त में स्थानांतरित किए जाने वाले कर्मचारियों को नए वृत्त की वरिष्ठता सूची में सीधे सबसे नीचे रखने का प्रावधान किया गया था। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस शर्त को संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के मूल सिद्धांतों के विपरीत मानते हुए एक सीमित दायरे में असंवैधानिक करार देकर खारिज कर दिया है।

फॉरेस्ट गार्ड्स की याचिका

मामले की शुरुआत वर्ष 2013 में सीधी भर्ती के जरिए नियुक्त किए गए कुछ फॉरेस्ट गार्ड्स द्वारा दायर की गई याचिकाओं से हुई थी। इन कर्मचारियों ने अदालत को बताया कि उनका तबादला पूरी तरह से प्रशासनिक कारणों से किया गया था, लेकिन इसके बावजूद भर्ती परीक्षा में प्राप्त उनकी मूल मेरिट और वरिष्ठता को नजरअंदाज कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क था कि वैधानिक भर्ती नियमों को दरकिनार करते हुए केवल एक कार्यपालिक सर्कुलर के आधार पर उनकी सीनियरिटी को नीचे धकेल दिया गया, जिससे उनके भविष्य के प्रमोशन के अवसर बुरी तरह प्रभावित हुए।

राज्य शासन की दलीलें और कोर्ट की तीखी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने अपने बचाव में दलील दी कि 31 जुलाई 2014 के सर्कुलर और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 के प्रावधानों के मुताबिक, अंतरवृत्त स्थानांतरण की स्थिति में कर्मचारी की वरिष्ठता नए वृत्त में सबसे नीचे ही तय होती है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ये कर्मचारी तबादले के माध्यम से नहीं बल्कि सीधी भर्ती से आए थे। प्रशासनिक तबादला सेवा का एक रूटीन हिस्सा है और इसे किसी भी रूप में कर्मचारी के लिए दंड का आधार नहीं बनाया जा सकता।

90 दिनों के भीतर नई वरिष्ठता सूची तैयार करने का सख्त निर्देश

अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि जब तक किसी ठोस वैधानिक प्रावधान में स्पष्ट रूप से ऐसा न लिखा हो, तब तक प्रशासनिक तबादले की वजह से कर्मचारियों को किसी भी तरह के प्रतिकूल परिणामों का सामना नहीं करना पड़ सकता। इस महत्वपूर्ण आदेश के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन को खारिज करने वाले 25 सितंबर 2025 के आदेश को भी पूरी तरह से रद्द कर दिया। साथ ही, राज्य शासन को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी प्रभावित कर्मचारियों की वरिष्ठता का पुनर्निर्धारण उनकी मूल भर्ती मेरिट और लागू वैधानिक नियमों के तहत आगामी 90 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से करें।
Chandan Das

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