Thalapathy Vijay: तमिलनाडु में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। शनिवार को तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य के सांसदों के साथ अहम बैठक की। बैठक में केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन और इसके संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। हालांकि, राज्य की प्रमुख पार्टियां द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) इस बैठक से दूर रहीं।

19 सांसद बैठक में हुए शामिल
बैठक में TVK के सहयोगी दलों कांग्रेस, वीसीके, एमडीएमके और आईयूएमएल के अलावा मित्र दलों भाकपा और माकपा के सांसद भी मौजूद रहे। कुल 19 सांसदों ने बैठक में हिस्सा लिया। इनमें कांग्रेस के 11 सांसद शामिल थे, जबकि भाकपा, माकपा और वीसीके के दो-दो सांसदों ने भाग लिया। इसके अलावा एमडीएमके और आईयूएमएल के एक-एक सांसद बैठक में पहुंचे।

कई दलों ने नहीं लिया हिस्सा
द्रमुक के सहयोगी दल एमएनएम और डीएमडीके ने भी बैठक में भाग नहीं लिया। दोनों दलों के राज्यसभा में एक-एक सदस्य हैं। वहीं, अन्नाद्रमुक के चार राज्यसभा सांसद और उसकी सहयोगी पीएमके के एक राज्यसभा सदस्य ने भी बैठक से दूरी बनाए रखी। द्रमुक के लोकसभा में 22 और राज्यसभा में आठ सदस्य हैं। इस तरह बैठक में विपक्ष के प्रमुख राजनीतिक दलों की गैरमौजूदगी साफ तौर पर दिखाई दी।
चिदंबरम और थिरुमावलवन भी पहुंचे
बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम और वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री विजय ने शनिवार को चेन्नई स्थित कलैवनार अरंगम के सरकारी सभागार में बैठक की अध्यक्षता की। सरकारी सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु के मुख्य सचिव एम. साई कुमार ने छह और सात अगस्त को सांसदों को अलग-अलग निमंत्रण भेजकर बैठक में शामिल होने का आग्रह किया था।
DMK ने बैठक को बताया मजाक
द्रमुक ने मुख्यमंत्री विजय की पहल पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता ए. राजा ने पेरम्बलूर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बैठक को एक तरह की मजाकिया कवायद बताया। उनका कहना था कि TVK सरकार ऐसे विषय पर चर्चा कर रही है, जिसके बारे में उसे पर्याप्त जानकारी नहीं है। द्रमुक के इस रुख से साफ है कि पार्टी परिसीमन के मुद्दे पर विजय की रणनीति से सहमत नहीं है।

AIADMK ने लगाया नाटक का आरोप
अन्नाद्रमुक ने भी बैठक को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने इसे जल्दबाजी में आयोजित किया गया नाटक करार दिया। AIADMK का तर्क है कि संसद में परिसीमन को लेकर अभी कोई नया विधेयक पेश नहीं किया गया है और न ही केंद्र की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा हुई है। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब आधिकारिक प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई, तो मुख्यमंत्री को सांसदों की बैठक बुलाने की इतनी जल्दी क्यों है।
सांसदों को बुलाने पर भी सवाल
द्रमुक के एक सांसद ने भी बैठक को लेकर अपनी असहमति जाहिर की। उन्होंने कहा कि सांसदों को सीधे बुलाने के बजाय सरकार को पहले पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत करनी चाहिए थी। उनके मुताबिक, सांसद सामान्य तौर पर अपनी पार्टी के आधिकारिक रुख के अनुसार संसद में अपनी भूमिका निभाते हैं। इसलिए इस तरह की बैठक को अनावश्यक बताया गया।
परिसीमन के खिलाफ DMK का रुख
द्रमुक सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी तमिलनाडु के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने याद दिलाया कि पार्टी अध्यक्ष एम. के. स्टालिन परिसीमन के मुद्दे पर पहले ही अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं। द्रमुक का मानना है कि प्रस्तावित परिसीमन का राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर संभावित प्रभाव गंभीर विषय है और पार्टी इस मुद्दे पर तमिलनाडु के हितों की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।
बैठक ने बढ़ाई सियासी हलचल
मुख्यमंत्री विजय की बैठक में सहयोगी दलों की भागीदारी और DMK-AIADMK की अनुपस्थिति ने तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक दलों के अलग-अलग रुख सामने आने से आने वाले दिनों में राज्य की सियासत और गर्म होने की संभावना है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र के परिसीमन प्रस्ताव को लेकर तमिलनाडु के दल आगे किस रणनीति के साथ मैदान में उतरते हैं।
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