Vande Mataram Bill: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वंदे मातरम संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के बाद राष्ट्रगीत से जुड़े नए प्रावधानों को कानूनी रूप मिलने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार के मुताबिक, संशोधन के तहत जानबूझकर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा डालना या उसे रोकना अपराध माना जाएगा। सरकार ने इसे राष्ट्रगीत को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

संसद में बिना चर्चा विधेयक पारित होने का दावा
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि संशोधन विधेयक संसद में बिना किसी चर्चा के पारित हुआ। थरूर ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ दोनों का बेहद सम्मान करते हैं। हालांकि, उन्होंने नए प्रावधानों को लेकर कुछ व्यावहारिक सवाल भी उठाए हैं।

शशि थरूर ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत पर कही बात
शशि थरूर ने कहा कि राष्ट्रपति ने वंदे मातरम संशोधन को मंजूरी दे दी है। उनके अनुसार, संशोधन के तहत सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत और समाप्ति पर राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रगीत को भी पूरा गाना अनिवार्य होगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि वह राष्ट्रीय गीत के शुरुआती दो पदों के साथ-साथ पूरा राष्ट्रगान गा सकते हैं। इसके बावजूद उन्होंने इस व्यवस्था को लागू करने से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर विचार करने की जरूरत बताई।
‘इंसानी फितरत’ का जिक्र कर उठाया सवाल
थरूर ने अपने बयान में कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान होना जरूरी है, लेकिन कानून के जरिए सम्मान की भावना पैदा करना आसान नहीं है। उन्होंने इसे ‘इंसानी फितरत’ से जोड़ते हुए कहा कि इस पहलू को शायद उन लोगों ने नजरअंदाज किया है, जो इस बदलाव का समर्थन कर रहे हैं। उनका तर्क है कि किसी गीत या प्रतीक के प्रति वास्तविक सम्मान केवल कानूनी बाध्यता से सुनिश्चित नहीं किया जा सकता।
राष्ट्रगान के 52 सेकंड और राष्ट्रगीत के समय का तर्क
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में दोनों गीतों की अवधि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान के दौरान लोगों से करीब 52 सेकंड तक सम्मानपूर्वक खड़े रहने की अपेक्षा की जाती है। वहीं, उनके मुताबिक पूरे राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गायन में लगभग 3 मिनट 10 सेकंड का समय लगता है। थरूर ने इसी समय को आधार बनाते हुए सवाल किया कि क्या हर सरकारी कार्यक्रम में लोगों से इतनी लंबी अवधि तक खड़े रहने की अपेक्षा करना व्यावहारिक होगा।

तमिलनाडु के राज्य गीत का भी दिया उदाहरण
शशि थरूर ने अपने तर्क में तमिलनाडु का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में इन दोनों राष्ट्रीय गीतों से पहले तमिल भाषा में राज्य गीत गाए जाने का फैसला किया गया है। उनके अनुसार, राज्य गीत में करीब दो मिनट का समय लग सकता है। ऐसे में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और राज्य गीत को मिलाकर कार्यक्रम के दौरान अतिरिक्त समय काफी बढ़ सकता है। उन्होंने इसी आधार पर सरकारी आयोजनों की व्यावहारिकता को लेकर सवाल उठाया।
क्या हर कार्यक्रम में पांच मिनट खड़ा रहना संभव?
थरूर ने सवाल किया कि क्या वास्तव में यह उम्मीद की जा सकती है कि किसी कार्यक्रम में शामिल दर्शक शुरुआत और समाप्ति, दोनों अवसरों पर कई मिनट तक सम्मानपूर्वक खड़े रहें। उन्होंने अनुमान लगाया कि दोनों समय की प्रक्रिया को मिलाकर कार्यक्रम में लगभग 12 मिनट का अतिरिक्त समय जुड़ सकता है। कांग्रेस नेता का कहना है कि सम्मान और धैर्य को केवल कानून के जरिए लागू करना संभव नहीं है। उन्होंने इस पहलू पर व्यापक विचार की आवश्यकता जताई।
सम्मान बढ़ाने के बजाय उलटा असर होने की आशंका
कांग्रेस नेता ने आशंका जताई कि वंदे मातरम को कानूनी रूप से अनिवार्य करने का उद्देश्य यदि राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान बढ़ाना है, तो इसका परिणाम उम्मीद के विपरीत भी हो सकता है। उनके अनुसार, जब किसी भावना को कानूनी बाध्यता में बदल दिया जाता है, तो लोगों में स्वाभाविक सम्मान के बजाय औपचारिकता की भावना पैदा होने की संभावना रहती है। उन्होंने इसी कारण संशोधन के प्रभाव पर गंभीर चर्चा की जरूरत बताई।
विधेयक को दोनों सदनों से मिल चुकी है मंजूरी
वंदे मातरम संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिल चुकी है। लोकसभा ने इसे 30 जुलाई को पारित किया था, जबकि राज्यसभा ने इससे एक दिन पहले ही विधेयक को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद अब इसके प्रावधानों को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
राष्ट्रगीत को राष्ट्रीय गान जैसी कानूनी सुरक्षा
सरकार की ओर से कहा गया है कि संशोधन के बाद राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को वही कानूनी सुरक्षा प्राप्त होगी, जो वर्तमान में राष्ट्रगान को हासिल है। जानबूझकर राष्ट्रगीत के गायन में व्यवधान डालने या उसे रोकने की कार्रवाई को अपराध के दायरे में रखा गया है। सरकार इसे राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और उनकी गरिमा बनाए रखने से जोड़कर देख रही है।
राजनीतिक बहस के बीच सामने आया नया विवाद
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब वंदे मातरम संशोधन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। सरकार जहां इसे राष्ट्रगीत के सम्मान और सुरक्षा से जोड़ रही है, वहीं शशि थरूर जैसे विपक्षी नेता इसके व्यावहारिक प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में इस संशोधन के कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ सरकारी कार्यक्रमों में इसके क्रियान्वयन को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है।
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