US Troops Iraq Withdrawal: अमेरिका ने इराक में अपनी बची हुई सैन्य मौजूदगी को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सेना सितंबर 2026 के अंत तक इराक से अपने शेष सैनिकों को वापस बुला सकती है। इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने बुधवार को इस संबंध में जानकारी दी। इस फैसले के साथ इराक में अमेरिका का लंबे समय से चला आ रहा सैन्य अभियान एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच जाएगा।

अमेरिकी सैन्य मौजूदगी खत्म करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में
इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के प्रमुख के साथ मुलाकात के दौरान देश में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी समाप्त करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इराकी सरकार के अनुसार, अमेरिकी नेतृत्व वाले ISIS विरोधी गठबंधन की सैन्य मौजूदगी खत्म करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। आने वाले हफ्तों में बचे हुए अमेरिकी सैनिकों की वापसी पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

30 सितंबर तक वापसी पूरी करने की तैयारी
एक अमेरिकी अधिकारी ने भी पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना 30 सितंबर 2026 तक इराक से अपनी वापसी पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि तय कार्यक्रम के मुताबिक सैनिकों की वापसी पूरी होती है, तो इराक में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के लंबे दौर का अंत हो जाएगा। हालांकि, दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंध समाप्त होने की बजाय नई व्यवस्था के तहत आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
पिछले साल भी अमेरिका ने हटाए थे कई सैन्य ठिकाने
अमेरिका ने पिछले वर्ष इराक के अधिकांश हिस्सों से अपने सैन्य ठिकाने और सैनिकों की संख्या कम कर दी थी। इसके बावजूद उत्तरी इराक के कुर्द क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की सीमित मौजूदगी बनी हुई थी। अब अंतिम चरण में इन सैनिकों को भी वापस बुलाने की तैयारी की जा रही है। इससे इराक में अमेरिकी सेना की प्रत्यक्ष भूमिका लगभग पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
ISIS के खिलाफ अभियान से शुरू हुई थी मौजूदा तैनाती
इराक में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदा सैन्य तैनाती मुख्य रूप से आतंकी संगठन ISIS के खिलाफ अभियान से जुड़ी थी। वर्ष 2014 के बाद ISIS ने इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर अपना कब्जा स्थापित कर लिया था। इसके बाद इराकी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समर्थन की मांग की और अमेरिकी नेतृत्व में गठबंधन ने इराकी सुरक्षा बलों के साथ मिलकर आतंकवादी संगठन के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया।

ISIS के क्षेत्रीय कब्जे को खत्म करने में गठबंधन की भूमिका
अमेरिका के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ने इराकी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण, हथियार, खुफिया जानकारी और सैन्य सहायता उपलब्ध कराई। लंबे अभियान के बाद ISIS का इराक में बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय नियंत्रण खत्म कर दिया गया। इसके बाद गठबंधन की मुख्य युद्धक भूमिका समाप्त हो गई और अमेरिकी सैनिकों की भूमिका भी धीरे-धीरे प्रत्यक्ष लड़ाई से हटकर प्रशिक्षण और सलाह देने तक सीमित हो गई।
2021 में खत्म हुआ था प्रमुख युद्धक अभियान
ISIS के कब्जे वाले क्षेत्रों से आतंकवादी संगठन को पीछे धकेलने के बाद इराक में गठबंधन के प्रमुख युद्धक अभियानों का दौर समाप्त हो गया। वर्ष 2021 तक अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य अभियान की प्रकृति में बड़ा बदलाव आ चुका था। इसके बाद अमेरिकी सैनिक मुख्य रूप से इराकी सुरक्षा बलों को सलाह देने और प्रशिक्षण प्रदान करने की भूमिका में रहे। अब इराकी सुरक्षा तंत्र को पर्याप्त रूप से सक्षम मानते हुए अमेरिका अपनी सैन्य भूमिका समाप्त करने की दिशा में बढ़ रहा है।
2003 से शुरू हुआ था अमेरिका का सैन्य अध्याय
इराक में अमेरिकी सैन्य अभियान का इतिहास मौजूदा ISIS विरोधी मिशन से काफी पुराना है। वर्ष 2003 में अमेरिका ने इराक में सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके बाद कई वर्षों तक अमेरिकी सैनिकों की बड़ी संख्या वहां तैनात रही। वर्ष 2007 के दौरान आतंकवाद विरोधी अभियानों के बीच इराक में अमेरिकी सैनिकों की संख्या 1.70 लाख से अधिक तक पहुंच गई थी।
2011 में हुई थी पहली बड़ी वापसी
अमेरिकी सैन्य मौजूदगी में बड़ा बदलाव दिसंबर 2011 में आया, जब अमेरिका ने इराक से अपने सभी सैनिक वापस बुला लिए थे। उस समय माना गया था कि इराक में अमेरिकी सैन्य अभियान का प्रमुख चरण समाप्त हो चुका है। हालांकि, कुछ ही वर्षों बाद क्षेत्र में ISIS के तेजी से उभरने और उसके इराक तथा सीरिया के बड़े हिस्से पर कब्जे ने परिस्थितियां बदल दीं।
2014 में इराक के अनुरोध पर लौटे अमेरिकी सैनिक
वर्ष 2014 में ISIS के बढ़ते प्रभाव के बीच इराकी सरकार ने अमेरिकी मदद का अनुरोध किया। इसके बाद अमेरिकी सैनिक एक बार फिर इराक पहुंचे और अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के साथ मिलकर ISIS के खिलाफ अभियान शुरू किया। इस सैन्य अभियान का उद्देश्य आतंकवादी संगठन के कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस हासिल करना और इराकी सुरक्षा बलों को मजबूत करना था।
अब इराकी सुरक्षा बलों पर बड़ी जिम्मेदारी
अमेरिकी सैनिकों की संभावित पूर्ण वापसी के बाद इराक की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी मुख्य रूप से वहां के अपने सुरक्षा बलों पर होगी। इराकी सेना और सुरक्षा एजेंसियों को वर्षों से प्रशिक्षण और सहायता मिलने के बाद अब उन्हें देश की सुरक्षा के लिए अधिक आत्मनिर्भर माना जा रहा है। हालांकि, ISIS या अन्य आतंकवादी समूहों के संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
अमेरिका-इराक सुरक्षा सहयोग पूरी तरह खत्म नहीं होगा
सैनिकों की वापसी का अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका और इराक के बीच सुरक्षा संबंध पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे। दोनों देशों के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा संबंधी समन्वय दूसरे तरीकों से जारी रहने की संभावना है। अमेरिकी सैन्य भूमिका कम होने के बावजूद रणनीतिक और सुरक्षा साझेदारी बनाए रखने की कोशिश की जा सकती है।
23 साल पुराने सैन्य अध्याय का संभावित अंत
यदि 30 सितंबर तक अमेरिकी सैनिकों की वापसी पूरी हो जाती है, तो वर्ष 2003 से शुरू हुआ इराक में अमेरिकी सैन्य अभियान अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच जाएगा। करीब 23 वर्षों के दौरान अमेरिका की इराक नीति कई चरणों से गुजरी है—युद्ध, सैनिकों की वापसी, ISIS के खिलाफ दोबारा तैनाती और फिर प्रशिक्षण एवं सलाह की भूमिका। अब अमेरिकी सेना की पूर्ण वापसी इस लंबे सैन्य अध्याय को समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो सकती है।
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