Agriculture News
Agriculture News: भारत में हर साल बुनियादी ढांचे की कमी के कारण भारी मात्रा में फल, सब्जियां और अन्य बागवानी उत्पाद बाजार तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाते हैं। किसानों के लिए यह एक दोहरी मार है; एक तरफ उनकी कड़ी मेहनत बर्बाद होती है, वहीं दूसरी ओर सही स्टोरेज न होने के कारण उन्हें अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती है। इस गंभीर समस्या का समाधान निकालने के लिए भारत सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश भर में आधुनिक कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का जाल बिछाना है, ताकि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके और देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत हो।
सरकार की इस योजना का आधिकारिक नाम ‘कोल्ड स्टोरेज निर्माण/विस्तार/आधुनिकीकरण के लिए पूंजी निवेश सब्सिडी योजना’ है। इसका संचालन नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) द्वारा किया जाता है। यह योजना न केवल नए कोल्ड स्टोरेज बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है, बल्कि मौजूदा पुराने स्टोरेज को नई और उन्नत तकनीक से अपग्रेड करने के लिए भी प्रोत्साहित करती है। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक से लैस स्टोरेज यूनिट्स न केवल बिजली की बचत करेंगी, बल्कि फलों और सब्जियों की शेल्फ-लाइफ को भी काफी हद तक बढ़ा देंगी।
इस योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता बहुत आकर्षक है। मैदानी या सामान्य क्षेत्रों में प्रोजेक्ट की कुल लागत पर 35 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है। वहीं, अगर कोई निवेशक उत्तर-पूर्वी राज्यों, पहाड़ी क्षेत्रों या अनुसूचित क्षेत्रों में कोल्ड स्टोरेज लगाता है, तो उसे 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिल सकती है। सरकार ने अधिकतम सब्सिडी की सीमा 7.5 करोड़ रुपये तय की है। इसके अलावा, तकनीकी उपकरणों जैसे कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर (CA) जनरेटर के लिए 1.25 करोड़ और विशेष दरवाजों के लिए प्रति यूनिट 2.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता का प्रावधान भी रखा गया है।
यह योजना समावेशी है और इसका लाभ समाज के विभिन्न वर्ग उठा सकते हैं। इसके पात्र लाभार्थियों में व्यक्तिगत किसान, निजी उद्यमी, कंपनियां, किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह और सहकारी समितियां शामिल हैं। चूंकि यह एक क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना है, इसलिए आवेदक को सबसे पहले बैंक से ऋण प्राप्त कर प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य पूरा करना होता है। प्रोजेक्ट के सफलतापूर्वक चालू होने के बाद सरकार पात्रता के आधार पर सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के खाते या संबंधित बैंक को जारी कर देती है।
इस योजना का लाभ लेने के लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनानी होती है। सबसे पहले आवेदक को एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करनी होती है, जिसमें स्टोरेज का डिजाइन, तकनीकी विवरण और अनुमानित लागत का जिक्र हो। इस रिपोर्ट को नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) के पास जमा करना होता है। बोर्ड की तकनीकी टीम प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता की जांच करती है। मंजूरी मिलने के बाद बैंक से लोन लेकर निर्माण कार्य शुरू किया जाता है। यूनिट तैयार होने के बाद अधिकारियों द्वारा अंतिम निरीक्षण किया जाता है और नियमों के अनुरूप पाए जाने पर सब्सिडी राशि स्वीकृत कर दी जाती है।
RCB vs GT Match Result: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के रोमांचक सफर में रॉयल…
Why Mobile Network Fails in Lift: हम सभी ने कभी न कभी यह अनुभव किया…
SRK King Movie Update: साल 2026 भारतीय सिनेमा के लिए बेहद ऐतिहासिक साबित हो रहा…
Rare Snake : भारत के जैव विविधता के खजाने में एक और अनमोल रत्न जुड़…
Ambikapur Municipal Budget : अंबिकापुर नगर निगम की सामान्य सभा में शुक्रवार को महापौर मंजूषा…
Karnataka SC Reservation News: बेंगलुरु में आयोजित मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता वाली कैबिनेट बैठक में…
This website uses cookies.