CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक बार फिर दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन की ओर से 5 सितंबर को शांतिपूर्ण मार्च निकालने की घोषणा की गई है। सीजेपी का कहना है कि सरकार के सामने रखी गई मांगों में से अभी भी तीन प्रमुख मांगों का समाधान नहीं हुआ है। संगठन ने इन मुद्दों को लेकर सरकार को दोबारा अल्टीमेटम दिया है और संकेत दिया है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जाएगा।
25 जुलाई का प्रदर्शन क्यों रोका था?
सीजेपी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि उसने करीब एक महीने पहले 25 जुलाई को प्रस्तावित प्रदर्शन को इस उम्मीद में रोका था कि सरकार उसकी सभी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई करेगी। संगठन का दावा है कि प्रदर्शन स्थगित करने के पीछे मुख्य उद्देश्य टकराव बढ़ाना नहीं, बल्कि सरकार को बातचीत और समाधान का अवसर देना था। हालांकि, सीजेपी के मुताबिक अब तक तीन अहम मुद्दों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
तीन मांगें अब भी अधूरी होने का दावा
सीजेपी ने जिन मांगों को लंबित बताया है, उनमें प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना, छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करना और दर्ज एफआईआर वापस लेना शामिल है। इसके अलावा संगठन ने दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) से प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कथित कार्रवाई को लेकर माफी मांगने की मांग भी रखी है।
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर सवाल
सीजेपी ने अपने एक्स पोस्ट में पिछले प्रदर्शन की घटनाओं का उल्लेख करते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन ने आरोप लगाया कि उस दौरान लाठीचार्ज, आंसू गैस और पेलेट गन के इस्तेमाल से लेकर प्रदर्शनकारियों पर बिना बैज वाले लोगों द्वारा कथित हमलों तक की घटनाएं हुईं। सीजेपी का कहना है कि इन घटनाओं को लेकर जवाबदेही तय करना जरूरी है और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।
‘ब्लैक मंडे’ को लेकर सीजेपी ने उठाए सवाल
संगठन ने अपने पोस्ट में पिछले घटनाक्रम को ‘ब्लैक मंडे’ बताते हुए कहा कि उस दिन की कार्रवाई से जुड़े कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। सीजेपी के मुताबिक उसने कार्रवाई और प्रशासनिक फैसलों को लेकर कुल 11 सवाल उठाए थे, लेकिन अभी तक उन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिले हैं। संगठन का कहना है कि समय बीतने के साथ इन सवालों का जवाब देने की मांग और ज्यादा महत्वपूर्ण होती जा रही है।
जवाबदेही तय करने की मांग
सीजेपी का कहना है कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके साथ प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। संगठन ने आरोप लगाया कि यदि कार्रवाई के दौरान नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इसी आधार पर सीजेपी पुलिस और सुरक्षा बलों से जवाबदेही तथा माफी की मांग कर रही है।
सरकार से जल्द समाधान की अपील
संगठन ने सरकार से अपील की है कि वह लंबित मांगों पर जल्द फैसला ले, ताकि आंदोलन को आगे बढ़ाने की जरूरत न पड़े। सीजेपी के अनुसार, 25 जुलाई के प्रदर्शन को रोकने का फैसला इसी उम्मीद में लिया गया था कि सरकार बातचीत के जरिए विवाद का समाधान करेगी। लेकिन मांगें लंबित रहने के कारण अब संगठन ने 5 सितंबर को शांतिपूर्ण मार्च का कार्यक्रम घोषित किया है।
शांतिपूर्ण मार्च के जरिए दबाव बनाने की तैयारी
सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि 5 सितंबर का मार्च शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा। संगठन का उद्देश्य अपनी मांगों को सार्वजनिक रूप से सामने रखना और सरकार पर समाधान के लिए दबाव बनाना है। हालांकि, आगे की रणनीति सरकार की प्रतिक्रिया और लंबित मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगी। फिलहाल सीजेपी ने मुआवजे, एफआईआर वापसी और पुलिस-आरएएफ की कथित कार्रवाई पर माफी को अपने आंदोलन के प्रमुख मुद्दे बनाए हैं।
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