Goa Anti Conversion Law: गैरकानूनी धर्मांतरण पर उम्रकैद, कैबिनेट ने दी सख्त कानून को मंजूरी

गोवा कैबिनेट ने जबरन, धोखे या लालच के जरिए कराए जाने वाले गैरकानूनी धर्मांतरण पर रोक लगाने वाले सख्त विधेयक को मंजूरी दी है। प्रस्तावित कानून में गंभीर मामलों में उम्रकैद और भारी जुर्माने का प्रावधान है। अब यह बिल विधानसभा में पेश किया जाएगा, जहां इसके प्रावधानों पर चर्चा और अंतिम फैसला होगा।

Goa Anti Conversion Law: गोवा सरकार ने जबरन या गैरकानूनी तरीके से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में ‘गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध विधेयक, 2026’ को विधानसभा में पेश करने की मंजूरी दे दी गई। प्रस्तावित कानून में जबरदस्ती, दबाव, धोखाधड़ी, लालच या शादी के माध्यम से कराए जाने वाले कथित धर्म परिवर्तन के खिलाफ कड़े प्रावधान किए गए हैं। सरकार के अनुसार, कानून का उद्देश्य ऐसे लोगों की सुरक्षा करना है, जिन्हें किसी तरह के दबाव या अनुचित तरीके से धर्म बदलने के लिए मजबूर किया जाता है।

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धर्म परिवर्तन पर दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा का प्रावधान

प्रस्तावित विधेयक में गैरकानूनी धर्म परिवर्तन के मामलों में दोषी पाए जाने वाले लोगों के लिए जेल और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सामान्य मामलों में दोषी को कम से कम तीन साल और अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है। इसके साथ ही कम से कम 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। कानून का उद्देश्य धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया में जबरदस्ती, धोखे या अनुचित प्रभाव के इस्तेमाल पर रोक लगाना है।

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पीड़ितों को पांच लाख रुपये तक मुआवजे का प्रस्ताव

विधेयक में केवल आरोपी को दंडित करने की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि पीड़ित को आर्थिक राहत देने का भी प्रावधान प्रस्तावित है। गैरकानूनी धर्म परिवर्तन से प्रभावित व्यक्ति को परिस्थितियों के आधार पर पांच लाख रुपये तक का मुआवजा दिए जाने की व्यवस्था हो सकती है। सरकार का मानना है कि ऐसे मामलों में पीड़ितों के हितों की रक्षा और उन्हें सहायता उपलब्ध कराना भी कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।

नाबालिग और कमजोर वर्ग के मामलों में ज्यादा सख्त प्रावधान

यदि कथित गैरकानूनी धर्म परिवर्तन का शिकार कोई नाबालिग, मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति, महिला या अनुसूचित जनजाति वर्ग का सदस्य है, तो प्रस्तावित कानून में अधिक कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में दोषी को पांच से 14 साल तक की जेल हो सकती है और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इन प्रावधानों का उद्देश्य कमजोर या संवेदनशील वर्गों को दबाव और शोषण से अतिरिक्त सुरक्षा देना बताया गया है।

शादी के जरिए धर्म परिवर्तन पर भी नजर

प्रस्तावित कानून में शादी के माध्यम से धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों को भी शामिल किया गया है। यदि किसी विवाह का उद्देश्य कथित तौर पर केवल गैरकानूनी धर्म परिवर्तन कराना या शादी के जरिए धर्म बदलवाना पाया जाता है, तो ऐसी शादी को अमान्य घोषित किए जाने का प्रावधान हो सकता है। सरकार ने विवाह और धर्म परिवर्तन के बीच किसी तरह के कथित अनुचित संबंध को रोकने के लिए विधेयक में यह व्यवस्था शामिल की है।

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मुख्य सचिव ने बताया कानून का उद्देश्य

गैरकानूनी धर्म परिवर्तन को लेकर राज्य के मुख्य सचिव वी. कंडावेलू ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य कमजोर और भोले-भाले लोगों को गैरकानूनी तरीकों से धर्म परिवर्तन से बचाना है। सरकार के अनुसार, किसी व्यक्ति को जबरदस्ती, दबाव, धोखाधड़ी या लालच देकर दूसरे धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश को रोकना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से राज्य में नए कानूनी प्रावधान लाने की तैयारी की गई है।

धर्म बदलने से पहले 60 दिन की सूचना जरूरी होगी

प्रस्तावित विधेयक में स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति के लिए भी एक निर्धारित प्रक्रिया रखी गई है। इसके तहत धर्म बदलने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को घोषणा पत्र देना होगा। इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि धर्म परिवर्तन व्यक्ति की अपनी इच्छा से किया जा रहा है और इसके पीछे किसी प्रकार का दबाव, जबरदस्ती या अनुचित प्रभाव नहीं है।

धर्म परिवर्तन की रस्म कराने वाले को भी देनी होगी जानकारी

प्रस्तावित व्यवस्था केवल धर्म बदलने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगी। धर्म परिवर्तन की रस्म कराने वाले व्यक्ति को भी जिला मजिस्ट्रेट को इसकी जानकारी देनी होगी। इसके लिए रस्म आयोजित होने से कम से कम एक महीने पहले सूचना देने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। सरकार का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को प्रशासनिक निगरानी के दायरे में लाना बताया गया है, ताकि स्वैच्छिक और गैरकानूनी धर्म परिवर्तन के बीच अंतर स्पष्ट किया जा सके।

विधानसभा में चर्चा के बाद तय होगा अंतिम स्वरूप

कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब प्रस्तावित विधेयक को विधानसभा में पेश किया जाएगा। सदन में चर्चा और विचार-विमर्श के दौरान इसके प्रावधानों पर बहस हो सकती है। विधेयक पारित होने और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसके प्रावधान लागू किए जा सकेंगे। फिलहाल सरकार ने इसे धर्म परिवर्तन के कथित गैरकानूनी तरीकों पर रोक लगाने और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के उद्देश्य से महत्वपूर्ण कदम बताया है।

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Chandan Das

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