Delhivery Q1 Results: लॉजिस्टिक्स सेक्टर की प्रमुख कंपनी डेल्हीवरी ने 8 अगस्त को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी जून तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए। कंपनी के मुताबिक, अप्रैल से जून के दौरान उसका कंसोलिडेटेड प्रॉफिट सालाना आधार पर 65 फीसदी घटकर 31.9 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने 91 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। वहीं, मार्च तिमाही में डेल्हीवरी का प्रॉफिट 72.3 करोड़ रुपये रहा था।

रेवेन्यू में मजबूत बढ़ोतरी के बावजूद मुनाफा घटा
मुनाफे में गिरावट के बावजूद कंपनी के ऑपरेशंस से मिलने वाले रेवेन्यू में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। जून तिमाही में डेल्हीवरी का ऑपरेशनल रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 28 फीसदी बढ़कर 2,930.7 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी का रेवेन्यू 2,294 करोड़ रुपये था। मार्च तिमाही में यह आंकड़ा 2,850 करोड़ रुपये रहा था। यानी कारोबार के स्तर पर कंपनी ने वृद्धि दर्ज की, लेकिन खर्च बढ़ने के कारण इसका सीधा फायदा मुनाफे में नहीं दिखा।

लेबर की कमी बनी मुनाफे में गिरावट की बड़ी वजह
कंपनी ने बताया कि जून तिमाही के दौरान लेबर की उपलब्धता कम रहने से उसके ऑपरेशनल खर्च पर दबाव बढ़ा। डेल्हीवरी के मुताबिक, कर्मचारियों की कमी के बावजूद नेटवर्क की सर्विस क्वालिटी बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पड़े। कंपनी ने शेयरहोल्डर्स को भेजे पत्र में तिमाही को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि लेबर उपलब्धता, जियोपॉलिटिकल तनाव और लेबर कोड से जुड़ी चुनौतियों का असर कारोबार पर पड़ा।
मध्य पूर्व तनाव से बढ़ी फ्यूल कॉस्ट
कंपनी के खर्च पर सिर्फ लेबर संकट का ही असर नहीं पड़ा। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली, जिसका सीधा प्रभाव ईंधन की लागत पर पड़ा। लॉजिस्टिक्स कारोबार में फ्यूल एक महत्वपूर्ण खर्च होता है। ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने कंपनी के मार्जिन पर अतिरिक्त दबाव बनाया और मुनाफे में गिरावट की स्थिति और गंभीर हो गई।
कंपनी का कुल खर्च 29 फीसदी बढ़ा
जून तिमाही में डेल्हीवरी का कुल खर्च सालाना आधार पर 29 फीसदी बढ़कर 3,011.6 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का एक्सपेंसेज 2,326.6 करोड़ रुपये था। मार्च तिमाही में भी यह खर्च 2,851.1 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। कंपनी ने माना कि लेबर से जुड़ी समस्याओं के कारण कर्मचारियों पर होने वाली लागत बढ़ी, जबकि फ्यूल खर्च में वृद्धि ने भी कुल खर्च को प्रभावित किया।

Delhivery Maps से नए कारोबार पर कंपनी का फोकस
डेल्हीवरी ने तिमाही के दौरान अपने टेक्नोलॉजी और डेटा आधारित कारोबार को भी आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया। कंपनी ने अपने प्रोपराइटरी GIS डेटा को नए रेवेन्यू स्रोत में बदलने के उद्देश्य से Delhivery Maps लॉन्च किया है। कंपनी को उम्मीद है कि मैपिंग और लोकेशन डेटा से जुड़ी यह पहल भविष्य में कारोबार के नए अवसर पैदा कर सकती है और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी।
इस साल करीब 18 फीसदी चढ़ चुका है शेयर
डेल्हीवरी के शेयर ने 7 अगस्त को NSE पर 1.90 फीसदी की बढ़त दर्ज की और 472.40 रुपये के भाव पर बंद हुआ। साल 2026 में अब तक कंपनी के शेयर में करीब 18 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। हालांकि, लंबी अवधि में शेयर का प्रदर्शन उतना मजबूत नहीं रहा। डेल्हीवरी का आईपीओ मई 2022 में आया था और इसका इश्यू साइज करीब 487 करोड़ रुपये था। निवेशकों को शेयर 487 रुपये प्रति शेयर के भाव पर आवंटित किए गए थे। इस लिहाज से देखें तो आईपीओ कीमत के मुकाबले शेयर में अब तक खास रिटर्न नहीं रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत
डेल्हीवरी के ताजा नतीजों से संकेत मिलता है कि कंपनी के कारोबार में वृद्धि जारी है, लेकिन बढ़ती परिचालन लागत मुनाफे के लिए चुनौती बनी हुई है। आने वाली तिमाहियों में लेबर उपलब्धता, ईंधन कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निवेशकों की नजर रहेगी। कंपनी के नए टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स और बढ़ते रेवेन्यू का असर अगर लागत को नियंत्रित करने के साथ दिखता है, तो मुनाफे में सुधार की गुंजाइश बन सकती है।
निवेश संबंधी जरूरी डिस्क्लेमर
यह खबर केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है। किसी शेयर में निवेश करने से पहले निवेशकों को कंपनी के वित्तीय नतीजों, जोखिमों और बाजार की परिस्थितियों का स्वतंत्र रूप से अध्ययन करना चाहिए तथा जरूरत पड़ने पर प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की राय लेनी चाहिए।
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