South China Sea Tension: दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच जारी विवाद के बीच अमेरिका ने चीन के एक नए कदम का कड़ा विरोध किया है। अमेरिका ने स्कारबोरो रीफ पर चीन की ओर से राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व स्थापित करने के फैसले को खारिज कर दिया है। वॉशिंगटन का कहना है कि इस कदम से फिलीपींस के मछुआरों के लिए उनके पारंपरिक मछली पकड़ने वाले इलाकों तक पहुंच मुश्किल हो सकती है। अमेरिका ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह अपने सहयोगी फिलीपींस के साथ मजबूती से खड़ा है।

अमेरिका ने चीन के कदम को बताया अस्थिर करने वाला
अमेरिकी विदेश विभाग ने जारी बयान में कहा कि अमेरिका स्कारबोरो रीफ पर चीन के कथित अस्थिर करने वाले राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व को लागू करने के प्रयासों का समर्थन नहीं करता। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, चीन के इस कदम से फिलीपींस के उन मछुआरों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में मछली पकड़ते रहे हैं। वॉशिंगटन ने कहा कि वह दक्षिण चीन सागर में नियम आधारित व्यवस्था और स्वतंत्र एवं खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के समर्थन के लिए प्रतिबद्ध है।

2016 के मध्यस्थता फैसले का भी दिया हवाला
अमेरिका ने चीन की कार्रवाई को साल 2016 में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए फैसले के संदर्भ में भी देखा है। अमेरिकी विदेश विभाग का आरोप है कि चीन अपने पड़ोसी देशों की कीमत पर दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय और समुद्री दावों को लगातार आगे बढ़ा रहा है। अमेरिका के मुताबिक, स्कारबोरो रीफ पर उठाया गया नया कदम इसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
पर्यावरण और कानूनी तर्कों पर अमेरिका ने उठाए सवाल
वॉशिंगटन ने आरोप लगाया कि चीन दक्षिण चीन सागर में अपने दावों को मजबूत करने के लिए पर्यावरण संरक्षण और कानूनी तर्कों का इस्तेमाल कर रहा है। अमेरिकी बयान में कहा गया कि ऐसे कदमों के जरिए चीन एकतरफा तरीके से अपने क्षेत्रीय दावों को आगे बढ़ा रहा है। अमेरिका ने कहा कि वह फिलीपींस की संप्रभुता और अधिकारों के समर्थन के साथ-साथ स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता कायम रखेगा।
चीन ने स्कारबोरो शोआल के लिए बनाए नए नियम
अमेरिका की प्रतिक्रिया चीन द्वारा स्कारबोरो शोआल को लेकर नए प्रबंधन उपायों की घोषणा के बाद आई है। चीन और फिलीपींस के बीच विवादित इस समुद्री क्षेत्र को फिलीपींस और अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों में स्कारबोरो शोआल के नाम से जाना जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने 1 अगस्त को इस क्षेत्र के लिए नए प्रबंधन नियमों की घोषणा की। इन नियमों में कुल 16 अनुच्छेद हैं, जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व के प्रशासन और निगरानी की व्यवस्था को निर्धारित करना है।

सितंबर 2025 में रिजर्व को मंजूरी मिली थी
चीन की स्टेट काउंसिल ने सितंबर 2025 में स्कारबोरो शोआल में राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व स्थापित करने को मंजूरी दी थी। इसके बाद नए प्रबंधन उपाय चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय, राष्ट्रीय वानिकी एवं घासभूमि प्रशासन, चाइना कोस्ट गार्ड और हैनान प्रांत की सरकार की ओर से संयुक्त रूप से जारी किए गए। चीनी मीडिया के मुताबिक, इन नियमों का उद्देश्य संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय, सूचना साझा करने और निगरानी को मजबूत करना है।
स्कारबोरो रीफ पर लंबे समय से विवाद
स्कारबोरो रीफ दक्षिण चीन सागर में स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है, जिस पर चीन और फिलीपींस के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। दोनों देशों के बीच समुद्री अधिकारों और संसाधनों को लेकर कई बार तनाव की स्थिति बन चुकी है। फिलीपींस के मछुआरों की इस क्षेत्र तक पहुंच भी विवाद का एक प्रमुख मुद्दा रही है।
2016 के फैसले में चीन के दावे को नहीं मिला आधार
साल 2016 में संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि यानी UNCLOS के तहत गठित मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने दक्षिण चीन सागर विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला दिया था। न्यायाधिकरण ने कहा था कि फिलीपींस के अनन्य आर्थिक क्षेत्र में मौजूद संसाधनों पर चीन के ऐतिहासिक दावे का कोई कानूनी आधार नहीं है। हालांकि, चीन ने उस फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।
अमेरिका-फिलीपींस गठजोड़ पर भी नजर
स्कारबोरो रीफ को लेकर ताजा विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और फिलीपींस के बीच सुरक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। अमेरिका कई मौकों पर दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस के अधिकारों के समर्थन की बात कह चुका है। वहीं चीन अपने समुद्री दावों को लेकर लगातार सक्रिय है। ऐसे में स्कारबोरो शोआल पर राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व और नए प्रबंधन नियमों को लेकर अमेरिका की आपत्ति क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।
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