US Election : अमेरिका के मिशिगन राज्य में डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनेट प्राइमरी में प्रोग्रेसिव नेता अब्दुल एल-सैयद ने महत्वपूर्ण जीत दर्ज की है। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के समर्थन वाली उम्मीदवार और मौजूदा प्रतिनिधि हेली स्टीवंस को कड़े मुकाबले में हराकर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बनने का अधिकार हासिल किया। इस परिणाम को डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव गुट की बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है। पूर्व सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी रह चुके एल-सैयद का अभियान पूरे चुनाव के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नतीजा पार्टी के भीतर बदलते राजनीतिक रुझानों का संकेत भी देता है।

चुनाव में रिकॉर्ड चुनावी खर्च बना चर्चा का विषय
मिशिगन की इस प्राइमरी में बाहरी संगठनों की सक्रिय भूमिका भी देखने को मिली। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकन इजरायल पब्लिक अफेयर्स कमेटी (AIPAC) ने हेली स्टीवंस के समर्थन में लगभग 3.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 304 करोड़ रुपये) खर्च किए। इसे हाल के वर्षों की सबसे महंगी प्राइमरी प्रतिस्पर्धाओं में से एक माना जा रहा है। चुनावी अभियान के दौरान दोनों उम्मीदवारों के समर्थन में विभिन्न संगठनों और राजनीतिक समूहों ने व्यापक प्रचार किया, जिससे यह मुकाबला राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बन गया।

डोनाल्ड ट्रंप ने दी तीखी प्रतिक्रिया
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यह परिणाम रिपब्लिकन पार्टी के लिए “बहुत अच्छी खबर” है। ट्रंप ने अपने पोस्ट में अब्दुल एल-सैयद की तीखी आलोचना करते हुए उन्हें “कम्युनिस्ट” बताया और उन पर इजरायल तथा यहूदी समुदाय के प्रति विरोधी रुख रखने का आरोप लगाया। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस चुनाव में शुरुआती सर्वेक्षण वास्तविक नतीजों का सही अनुमान नहीं लगा सके और मुकाबला अपेक्षा से अधिक कड़ा रहा।
प्राइमरी में कई मुद्दों पर हुई तीखी बहस
हालांकि शुरुआती सर्वेक्षणों में अब्दुल एल-सैयद को बढ़त दिखाई जा रही थी, लेकिन मतदान के दौरान मुकाबला काफी करीबी साबित हुआ। चुनाव प्रचार के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं, आव्रजन (इमिग्रेशन) और इजरायल से जुड़े मुद्दे प्रमुख चर्चा का विषय रहे। हेली स्टीवंस और उनके समर्थकों ने एल-सैयद पर यहूदी विरोधी सोच और महिलाओं से जुड़े कुछ मुद्दों पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, एल-सैयद के समर्थकों ने आरोप लगाया कि उनके प्रतिद्वंद्वी के चुनाव अभियान में इस्लामोफोबिया को बढ़ावा दिया गया। इन आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच चुनावी मुकाबला लगातार सुर्खियों में बना रहा।
डेमोक्रेटिक नेतृत्व को लगा राजनीतिक झटका
एल-सैयद की जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के कई प्रभावशाली नेताओं के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है। सीनेट में डेमोक्रेटिक अल्पमत नेता चक शूमर और मिशिगन की गवर्नर ग्रेचेन व्हिटमर ने खुलकर हेली स्टीवंस का समर्थन किया था। इसके बावजूद उनकी उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। अब आम चुनाव में अब्दुल एल-सैयद का मुकाबला रिपब्लिकन पार्टी के पूर्व प्रतिनिधि माइक रोजर्स से होने की संभावना है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मिशिगन एक महत्वपूर्ण “बैटलग्राउंड स्टेट” है और यहां का चुनाव परिणाम अमेरिकी सीनेट में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

श्री थानेदार भी प्राइमरी चुनाव हार गए
मिशिगन में डेमोक्रेटिक प्राइमरी के दौरान एक और महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया। 13वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में मौजूदा सांसद श्री थानेदार को डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट उम्मीदवार डोनावन मैककिनी ने पराजित कर दिया। इस हार के साथ थानेदार भी उन मौजूदा सांसदों में शामिल हो गए, जिन्हें प्रोग्रेसिव उम्मीदवारों ने चुनाव में मात दी। विश्लेषकों का मानना है कि अब्दुल एल-सैयद और डोनावन मैककिनी की जीत डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर वैचारिक बदलाव की ओर संकेत करती है। आने वाले समय में पार्टी की नीतियों और चुनावी रणनीति पर इसका असर पड़ सकता है। कई राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि मिशिगन के इन परिणामों का प्रभाव भविष्य के अमेरिकी चुनावों, विशेष रूप से 2028 के राष्ट्रपति चुनाव, की रणनीति और गठबंधन की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।
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