Mohan Bhagwat news: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने वैश्विक राजनीति और भारत के बढ़ते प्रभाव पर तीखी टिप्पणी की है। अमेरिका और पाकिस्तान की कथित बढ़ती नजदीकियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि “आजकल सांप जैसे दोस्त हो गए हैं, जो असल में खतरा हैं, उन्हें पुचकारा जा रहा है।”
भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ (शुल्क) बढ़ाने की धमकी दी है और अमेरिका का रुख पाकिस्तान की ओर नरम होता दिखाई दे रहा है, खासकर पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर से ट्रंप की कथित बातचीत के बाद।
सांप की कहानी से साधा निशाना
मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में श्रोताओं को संबोधित करते हुए सांप की कहानी सुनाई और उसे अमेरिका की नीति से जोड़ा। उन्होंने कहा: “एक जहरीला सांप रास्ते में रहता था, जिससे लोग डरते थे। लेकिन जब तथागत (भगवान बुद्ध) वहां से गुजरे, तो सांप ने उन्हें नहीं काटा।” इसके ज़रिए उन्होंने यह समझाने की कोशिश की कि हर विषैला जीव हमेशा नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो दिखावटी मित्रता करके असल में दबाव बनाने की कोशिश करते हैं।
अमेरिका को घेरा बिना नाम लिए
RSS प्रमुख ने किसी देश का नाम लिए बगैर स्पष्ट किया कि भारत की तरक्की से कुछ देश डरे हुए हैं, और इसलिए वे भारत के विरोधियों को सहलाकर भारत पर दबाव बनाने की नीति अपना रहे हैं। उन्होंने कहा “भारत अगर बड़ा हो गया तो क्या होगा, ये सोचकर कुछ देश टैरिफ लगाते हैं। लेकिन जिससे सच में डरते हैं, उसे गले लगा रहे हैं। सात समुंदर पार बैठे देश को भारत से डरने की जरूरत क्यों है?”
आत्मबोध और राष्ट्रवाद पर दिया जोर
मोहन भागवत ने आत्मबोध और सांस्कृतिक पहचान पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि”आज लोग पूछते हैं कि शरीर के बाद क्या? यह सवाल संघ से जुड़े या गैर-संघ के लोग भी करते हैं।”उन्होंने कहा कि भारत को एक मजबूत राष्ट्र के रूप में खड़ा होना है और जो दुनिया में बड़ा होता है, उसी की बात सुनी जाती है। इसलिए देशवासियों को आत्मविश्वास और आत्मबोध के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
राजनीतिक संदर्भ और प्रतिक्रियाएं
मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी नीतियों को लेकर भारत में चिंता और आलोचना दोनों का माहौल है।विशेष रूप से राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया बयानों और पाकिस्तान से कूटनीतिक नजदीकी ने भारत के रणनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। भागवत के बयान को राजनीतिक और कूटनीतिक सन्देश के रूप में देखा जा रहा है।
मोहन भागवत का यह बयान न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भारत की चिंताओं को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि संघ अब वैश्विक मुद्दों पर भी खुलकर विचार रखने लगा है।भारत की मजबूती ही उसका सबसे बड़ा उत्तर है यही संदेश आरएसएस प्रमुख देने की कोशिश कर रहे हैं।
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Mohan Bhagwat news: ‘सांप जैसे हो गए हैं दोस्त’, ट्रंप-आसिम मुनीर पर मोहन भागवत का तीखा बयान
Mohan Bhagwat news: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने वैश्विक राजनीति और भारत के बढ़ते प्रभाव पर तीखी टिप्पणी की है। अमेरिका और पाकिस्तान की कथित बढ़ती नजदीकियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि “आजकल सांप जैसे दोस्त हो गए हैं, जो असल में खतरा हैं, उन्हें पुचकारा जा रहा है।”
भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ (शुल्क) बढ़ाने की धमकी दी है और अमेरिका का रुख पाकिस्तान की ओर नरम होता दिखाई दे रहा है, खासकर पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर से ट्रंप की कथित बातचीत के बाद।
सांप की कहानी से साधा निशाना
मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में श्रोताओं को संबोधित करते हुए सांप की कहानी सुनाई और उसे अमेरिका की नीति से जोड़ा। उन्होंने कहा: “एक जहरीला सांप रास्ते में रहता था, जिससे लोग डरते थे। लेकिन जब तथागत (भगवान बुद्ध) वहां से गुजरे, तो सांप ने उन्हें नहीं काटा।” इसके ज़रिए उन्होंने यह समझाने की कोशिश की कि हर विषैला जीव हमेशा नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो दिखावटी मित्रता करके असल में दबाव बनाने की कोशिश करते हैं।
अमेरिका को घेरा बिना नाम लिए
RSS प्रमुख ने किसी देश का नाम लिए बगैर स्पष्ट किया कि भारत की तरक्की से कुछ देश डरे हुए हैं, और इसलिए वे भारत के विरोधियों को सहलाकर भारत पर दबाव बनाने की नीति अपना रहे हैं। उन्होंने कहा “भारत अगर बड़ा हो गया तो क्या होगा, ये सोचकर कुछ देश टैरिफ लगाते हैं। लेकिन जिससे सच में डरते हैं, उसे गले लगा रहे हैं। सात समुंदर पार बैठे देश को भारत से डरने की जरूरत क्यों है?”
आत्मबोध और राष्ट्रवाद पर दिया जोर
मोहन भागवत ने आत्मबोध और सांस्कृतिक पहचान पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि”आज लोग पूछते हैं कि शरीर के बाद क्या? यह सवाल संघ से जुड़े या गैर-संघ के लोग भी करते हैं।”उन्होंने कहा कि भारत को एक मजबूत राष्ट्र के रूप में खड़ा होना है और जो दुनिया में बड़ा होता है, उसी की बात सुनी जाती है। इसलिए देशवासियों को आत्मविश्वास और आत्मबोध के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
राजनीतिक संदर्भ और प्रतिक्रियाएं
मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी नीतियों को लेकर भारत में चिंता और आलोचना दोनों का माहौल है।विशेष रूप से राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया बयानों और पाकिस्तान से कूटनीतिक नजदीकी ने भारत के रणनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। भागवत के बयान को राजनीतिक और कूटनीतिक सन्देश के रूप में देखा जा रहा है।
मोहन भागवत का यह बयान न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भारत की चिंताओं को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि संघ अब वैश्विक मुद्दों पर भी खुलकर विचार रखने लगा है।भारत की मजबूती ही उसका सबसे बड़ा उत्तर है यही संदेश आरएसएस प्रमुख देने की कोशिश कर रहे हैं।
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