Kids Health : आजकल की व्यस्त जीवनशैली में केवल बड़ों पर ही नहीं, बल्कि बच्चों की दिनचर्या पर भी गहरा असर पड़ा है। आधुनिक युग के तनाव और अनियंत्रित दिनचर्या के कारण बच्चों की स्लीपिंग साइकिल पूरी तरह बदल गई है। कानपुर स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट और न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ज़ुबैर सरकार का कहना है कि माता-पिता अक्सर बच्चों की नींद की कमी को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, यह लापरवाही उनके भविष्य के लिए घातक साबित हो सकती है। अपर्याप्त नींद का सीधा प्रभाव बच्चे के शारीरिक विकास और मानसिक स्वास्थ्य की नींव को कमजोर कर देता है, जिसे समय रहते सुधारना बहुत आवश्यक है।

बच्चों के विकास में नींद की अहम भूमिका
नींद केवल शरीर को आराम देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बच्चों के संपूर्ण विकास की एक अनिवार्य प्रक्रिया है। जब बच्चा गहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद लेता है, तो उसकी याददाश्त तेज होती है और नई चीजें सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। नींद के दौरान ही शरीर का महत्वपूर्ण ‘ग्रोथ हार्मोन’ सक्रिय होता है, जो बच्चों की शारीरिक लंबाई, हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों के विकास के लिए उत्तरदायी है। इसलिए, स्वस्थ विकास के लिए बच्चों को पर्याप्त आराम मिलना अत्यंत आवश्यक है।

नींद की कमी से सेहत को होने वाले गंभीर नुकसान
यदि बच्चा नियमित रूप से पर्याप्त नींद नहीं ले पाता है, तो उसे कई छोटी और बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। सबसे पहले ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई (एकाग्रता की कमी), चिड़चिड़ापन, गुस्सैल स्वभाव और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं दिखाई देने लगती हैं। यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो बच्चों में मोटापे का खतरा बढ़ सकता है। इसके साथ ही, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) कमजोर हो जाती है, जिससे वे बार-बार बीमार पड़ने लगते हैं। दीर्घकालिक नींद की कमी बच्चों में गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को भी जन्म दे सकती है।
उम्र के अनुसार बच्चों को कितनी नींद चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, हर आयु वर्ग के बच्चे की नींद की आवश्यकता भिन्न होती है। एक स्वस्थ जीवनशैली के लिए इन मानकों का पालन करना चाहिए:
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4 से 12 महीने: झपकी सहित 12 से 16 घंटे।
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1 से 2 वर्ष: 11 से 14 घंटे।
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3 से 5 वर्ष: 10 से 13 घंटे।
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6 से 12 वर्ष: 9 से 12 घंटे।
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13 से 18 वर्ष: 8 से 10 घंटे।
अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये प्रभावी उपाय
बच्चों को गहरी नींद दिलाने के लिए माता-पिता को एक अनुशासित दिनचर्या का पालन करना चाहिए। सबसे पहले सोने और जागने का एक निश्चित समय निर्धारित करें। सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, टैबलेट और टीवी जैसे स्क्रीन से बच्चों को पूरी तरह दूर रखें। दिनभर बच्चों को पर्याप्त शारीरिक गतिविधियों और खेलों में शामिल करें, जिससे उन्हें रात में अच्छी नींद आए। यदि बच्चा भरपूर सोने के बाद भी थकान महसूस करता है, रात में तेज खर्राटे लेता है, या नींद आने में बार-बार परेशानी होती है, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत किसी विशेषज्ञ बाल रोग चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
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