Asian Games 2026 : भारतीय पुरुष हॉकी टीम मंगलवार शाम जापान के लिए रवाना हो गई। टीम का लक्ष्य एशियाई खेल 2026 में अपने महाद्वीपीय खिताब का सफलतापूर्वक बचाव करना है। एशियाई खेलों का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आइची-नागोया में किया जाएगा। हालांकि हॉकी प्रतियोगिता नागोया शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर काकामिगहारा में आयोजित होगी। भारतीय टीम इस बड़े टूर्नामेंट में मजबूत दावेदारी पेश करने की तैयारी में है।
हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में मैदान पर उतरेगा भारत
भारतीय टीम की कमान अनुभवी कप्तान हरमनप्रीत सिंह के हाथों में है। टीम के सामने पिछले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में आयोजित FIH हॉकी विश्व कप 2026 की निराशा को पीछे छोड़ने की चुनौती है। विश्व कप में भारत आठवें स्थान पर रहा था। अब खिलाड़ियों का पूरा ध्यान एशियाई खेलों पर है, जहां टीम बेहतर प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक हासिल करने की कोशिश करेगी।
स्वर्ण पदक जीतना इसलिए है बेहद अहम
एशियाई खेलों में हॉकी का स्वर्ण पदक भारत के लिए सिर्फ एक खिताब नहीं है। इस बार स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम को लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफिकेशन मिलेगा। ऐसे में भारतीय टीम के लिए खिताब बचाने का महत्व और बढ़ गया है। भारत ने 2023 में हांग्जो एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था और अब उसकी नजर लगातार दूसरी बार चैंपियन बनने पर है।
विश्व कप की गलतियों से सीखना चाहेगी टीम
विश्व कप में भारतीय टीम ने कई मुकाबलों में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया, लेकिन महत्वपूर्ण मौकों पर निरंतरता की कमी उसे भारी पड़ी। कड़े मुकाबलों में टीम अपेक्षित प्रदर्शन बरकरार नहीं रख सकी। एशियाई खेलों से पहले टीम इन गलतियों से सीखकर अपनी रणनीति को बेहतर करने पर काम कर रही है। खिलाड़ियों से जापान में अधिक संयमित, अनुशासित और लगातार प्रभावी प्रदर्शन की उम्मीद होगी।
एशियाई हॉकी में भारत का दबदबा
पिछले एक दशक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एशियाई हॉकी में अपनी मजबूत स्थिति कायम की है। भारत ने हांग्जो एशियाई खेलों के अलावा एशिया कप में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। मौजूदा चैंपियन अब जापान में भी अपने दबदबे को कायम रखना चाहेगा। टीम की नजर खिताब बरकरार रखने के साथ-साथ ओलंपिक टिकट हासिल करने पर भी होगी।
हर मैच पर ध्यान देने की रणनीति
कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने टूर्नामेंट से पहले कहा कि टीम बहुत आगे के बारे में सोचने के बजाय एक समय में एक मैच पर ध्यान देना चाहती है। उनका मानना है कि प्रतियोगिता में कोई मुकाबला आसान नहीं होता और लगातार अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी है। टीम का लक्ष्य प्रत्येक मैच के साथ सुधार करना और नॉकआउट चरण में जरूरत के समय अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।
कोच फुल्टन की नजर रणनीति के सही अमल पर
मुख्य कोच क्रेग फुल्टन भी खिलाड़ियों से अंतिम नतीजे के बारे में ज्यादा सोचने के बजाय अपनी योजनाओं को सही तरीके से मैदान पर लागू करने की उम्मीद करेंगे। उनका जोर मुकाबले-दर-मुकाबला रणनीति पर रहेगा। भारतीय टीम को अपनी रक्षात्मक मजबूती, पेनल्टी कॉर्नर और आक्रमण के बीच बेहतर संतुलन कायम करना होगा।
पूल ए में इन टीमों से होगा मुकाबला
चार बार की एशियाई चैंपियन भारतीय टीम को पूल ए में मेजबान जापान, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया के साथ रखा गया है। मौजूदा चैंपियन 20 सितंबर को इंडोनेशिया के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगा। इसके बाद टीम अन्य पूल मुकाबलों में अपना प्रदर्शन मजबूत करने की कोशिश करेगी। भारत का आखिरी पूल मैच 28 सितंबर को बांग्लादेश के खिलाफ निर्धारित है।
1 अक्टूबर को सेमीफाइनल, 3 अक्टूबर को फाइनल
टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण में 1 अक्टूबर को सेमीफाइनल मुकाबले खेले जाएंगे, जबकि खिताबी मुकाबला 3 अक्टूबर को होगा। भारतीय टीम की कोशिश पूल चरण में शीर्ष प्रदर्शन करने के बाद नॉकआउट मुकाबलों में अपनी लय बनाए रखने की होगी। लॉस एंजिलिस ओलंपिक की सीधी क्वालिफिकेशन दांव पर होने के कारण हर मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।
खिताब के साथ ओलंपिक टिकट पर नजर
भारतीय पुरुष हॉकी टीम अब जापान में अपने अभियान को सफल बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। विश्व कप की निराशा के बाद टीम के पास खुद को साबित करने का एक और बड़ा मौका है। खिलाड़ियों का लक्ष्य लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीतना और इसके साथ लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक में अपनी जगह पक्की करना होगा।
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