India-Sri Lanka Relations : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को श्रीलंका के साथ भारत के मजबूत और भरोसेमंद संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया। अपने तीन दिवसीय श्रीलंका दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि भारत मुश्किल परिस्थितियों में हमेशा अपने पड़ोसी देश के साथ खड़ा रहा है और भविष्य में भी संकट के समय श्रीलंका का साथ देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को केवल राजनीतिक या कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं बताते हुए इन्हें दिल और आत्मा से जुड़ा संबंध बताया।
भारत और श्रीलंका को बताया ‘सभ्यतागत जुड़वां’
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने भारत और श्रीलंका को ‘सभ्यतागत जुड़वां’ बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सदियों पुराना इतिहास, संस्कृति, परंपराएं और साझा विरासत मौजूद है। यही समानताएं दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों की बुनियाद हैं। रक्षा मंत्री ने श्रीलंका को भारत के सबसे करीबी मित्रों और महत्वपूर्ण साझेदारों में शामिल बताया।
संकट के समय भारत रहेगा श्रीलंका के साथ
राजनाथ सिंह ने भरोसा दिलाया कि जब भी श्रीलंका किसी कठिन परिस्थिति या संकट का सामना करेगा, भारत मदद के लिए आगे रहने वाले देशों में सबसे आगे होगा। उन्होंने कहा कि सच्ची दोस्ती की पहचान मुश्किल वक्त में होती है। भारत ने अतीत में भी जरूरत के समय श्रीलंका की सहायता की है और आने वाले समय में भी दोनों देशों के बीच सहयोग जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत अपने श्रीलंकाई मित्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा।
भारतीय समुदाय को बताया दोनों देशों के बीच सेतु
कोलंबो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने प्रवासी भारतीयों की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि श्रीलंका में रहने वाला भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम करता है। भारतीय समुदाय सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ दोनों देशों की जनता के बीच आपसी समझ और विश्वास बढ़ाने में अहम योगदान देता है।
आर्थिक विकास का भी किया जिक्र
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की। उन्होंने भारत की आर्थिक क्षमता और बदलती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करते हुए व्यापार और विनिर्माण क्षेत्र में देश की उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की।
निर्यात और मोबाइल निर्माण में भारत की प्रगति
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत से वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात वर्ष 2014 में करीब 45 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर लगभग 79 लाख करोड़ रुपये हो गया। उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता बन चुका है। उनके मुताबिक ये उपलब्धियां भारत की बढ़ती आर्थिक और औद्योगिक क्षमता को दर्शाती हैं।
38 देशों के साथ व्यापार समझौतों का उल्लेख
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने पिछले 12 वर्षों में 38 देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। इनमें आठ प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते भी शामिल हैं। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे भारतीय उत्पादों और कंपनियों के लिए यूरोपीय संघ के बड़े बाजार तक पहुंच के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने इसे भारत की बढ़ती आर्थिक और कूटनीतिक ताकत का संकेत बताया।
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